२७. बम्बई में सभा
बहनोईके देहान्तके दूसरे ही दिन मुझे बम्बईकी समाके लिए जाना था । सार्वजनिक सभाके लिए भाषणकी बात सोचने योग्य समय मुझे मिला नहीं था । लम्बे जागरणकी थकावट मालूम हो रही थी । आवाज भारी हो गई थी । ईश्वर जैसे-तैसे मुझे निबाह लेगा, यह सोचता हुआ मैं बम्बई पहुँचा । भाषण लिखनेकी बात तो मैंने सपने में भी नहीं सोची थी।
सभाकी तारीखके एक दिन पहले शामको पाँच बजे आज्ञानुसार मैं सर फीरोज- शाहके दफ्तर में हाजिर हुआ ।
उन्होंने पूछा, "गांधी, तुम्हारा भाषण तैयार है ? "
मैंने डरते-डरते उत्तर दिया, "जी नहीं, मैंने तो जबानी ही बोलनेकी बात सोच रखी है।"
" बम्बई में यह नहीं चलेगा । यहाँका रिपोटिंग खराब है । यदि सभासे हमें कुछ फायदा उठाना हो तो तुम्हारा भाषण लिखा हुआ ही होना चाहिए और वह रातों- रात छप जाना चाहिए। भाषण रात ही में लिख सकोगे न ? "
मैं घबराया। पर मैंने लिखनेका प्रयत्न करनेकी हामी भरी।
बम्बईके सिंह बोले, “तो मुंशी तुम्हारे पास भाषण लेने कब पहुँचे ? मैंने उत्तर दिया, " ग्यारह बजे । "
सर फीरोजशाहने अपने मुंशीको उस वक्त भाषण प्राप्त करके रातों-रात छपा लेनेका हुक्म दिया और मुझे बिदा किया ।
दूसरे दिन मैं सभामें गया । वहाँ मैं यह अनुभव कर सका कि भाषण लिखनेका आग्रह करनेमें कितनी बुद्धिमानी थी। फरामजी कावसजी इन्स्टिट्यूट के हालमें सभा थी। मैंने सुन रखा था कि जिस समामें सर फीरोजशाह बोलनेवाले हों, उस सभामें खड़े रहनेको जगह नहीं मिलती। ऐसी सभाओंमें विद्यार्थी समाज खास रस लेता था । ऐसी सभाका मेरा यह पहला अनुभव था। मुझे विश्वास हो गया कि मेरी आवाज कोई सुन न सकेगा । मैंने काँपते-काँपते भाषण पढ़ना शुरू किया। सर फीरोजशाह मुझे प्रोत्साहित करते जाते थे । "जरा और ऊँची आवाजसे, " यों कहते जाते थे । मुझे कुछ ऐसा ख्याल है कि इस प्रोत्साहनसे मेरी आवाज और धीमी पड़ती जाती थी ।
पुराने मित्र केशवराव देशपाण्डे मेरी मददको बढ़े । मैंने भाषण उनके हाथमें दिया । उनकी आवाज तो अच्छी थी, पर श्रोतागण क्यों सुनने लगे ? 'वाच्छा', 'वाच्छा' की पुकारसे हाल गूंज उठा । वाच्छा उठे। उन्होंने देशपाण्डेके हाथ से कागज ले लिया और मेरा काम बन गया । सभामें तुरन्त शान्ति छा गई और अथसे इति तक सभाने भाषण सुना । प्रथाके अनुसार जहाँ जरूरी था वहाँ 'शेम-शेम' (धिक्कार- धिक्कार) की और तालियोंकी आवाज भी होती रही। मुझे खुशी हुई।
१. भाषणको छपी प्रति उपलब्ध नहीं है। समाचारपत्रोंमें भाषणके विवरणके लिये देखिए खण्ड २,