क्या था, एक तिजोरी थी। वह कहींसे भी खुला न था। मुझे यह वर्ण-धर्म उलटा लगा। कांग्रेस में आनेवाले प्रतिनिधि जब इतनी छुआछूत रखते हैं, तो उन्हें भेजनेवाले लोग कितनी रखते होंगे? इस प्रकारका त्रैराशिक लगानेसे जो उत्तर मिला, उसपर मैने एक लम्बी साँस ली।
गन्दगीकी हद नहीं थी। चारों तरफ पानी ही पानी फैल रहा था। पाखाने कम थे। उनकी दुर्गन्धकी याद आज भी मुझे हैरान करती है। मैंने एक स्वयंसेवकको यह सब दिखाया। उसने साफ इनकार करते हुए कहा “यह तो भंगीका काम है।” मैंने झाड़ू माँगा। वह मेरा मुँह ताकता रहा। मैंने झाड़ू खोज निकाला। पाखाना साफ किया। पर यह तो मेरी अपनी सुविधाके लिए हुआ। भीड़ इतनी ज्यादा थी और पाखाने इतने कम थे कि हर बारके उपयोगके बाद उनकी सफाई होनी जरूरी थी। यह मेरी शक्तिके बाहरकी बात थी। इसलिए मैंने अपने लायक सुविधा करके सन्तोष माना। मैने देखा कि दूसरोंको यह गन्दगी जरा भी अखरती न थी।
पर बात यहीं खतम नहीं होती। रातके समय कोई-कोई तो कमरेके सामने-वाले बरामदे में ही निबट लेते थे। सवेरे स्वयंसेवकोंको मैंने मैला दिखाया। कोई साफ करने को तैयार न था। उसे साफ करनेका सम्मान भी मैंने ही प्राप्त किया। यद्यपि अब इन बातों में बहुत सुधार हो गया है, फिर भी अविचारी प्रतिनिधि अबतक कांग्रेसके शिविरको जहाँ-तहाँ मलत्याग करके गन्दा करते हैं, और सब स्वयंसेवक उसे साफ करनेके लिए तैयार नहीं होते।
मैंने देखा कि अगर कांग्रेसकी बैठक ऐसी गन्दगीमें अधिक दिनों तक जारी रहती तो अवश्य बीमारी फैल जाती।
१४. क्लर्क और बैरा
कांग्रेसके अधिवेशनको एक-दो दिनकी देर थी। मैंने निश्चय किया था कि कांग्रेसके कार्यालय में मेरी सेवा स्वीकार की जाये, तो सेवा करूँ और अनुभव लूँ। जिस दिन हम पहुँचे उसी दिन नहा-धोकर मैं कांग्रेसके कार्यालय में गया।
श्री भूपेन्द्रनाथ बसु और श्री घोषाल मन्त्री थे। मैं भूपेनबाबूके पास पहुँचा और सेवाकी माँग की। उन्होंने मेरी ओर देखा और बोले: “मेरे पास तो कोई काम नहीं है, पर शायद श्री घोषाल आपको कुछ काम दे सकेंगे। उनके पास जाइए।”
मैं घोषाल बाबूके पास गया। उन्होंने मुझे ध्यानसे देखा और जरा हँसकर मुझसे पूछा:
“मेरे पास तो क्लर्कका काम है, आप करेंगे?”
मैंने उत्तर दिया: “अवश्य करूँगा। मेरी शक्तिसे बाहर न हो, ऐसा हर काम करनेके लिए मैं आपके पास आया हूँ।”
“नौजवान, यही सच्ची भावना है।” और बगलमें खड़े स्वयंसेवकोंकी ओर देखकर बोले: “सुनते हो, यह युवक क्या कह रहा है?”