मैं बहुत खुश हुआ और उस बहनको उसी समय अपने सामने बैठाकर मैंने पत्र लिखाना शुरू कर दिया।
उसने केवल मेरे कारकुनका ही नहीं, बल्कि मैं मानता हूँ कि सगी लड़की अथवा बहनका पद सहज भावसे तुरन्त ही ले लिया। उसे कभी ऊँची आवाजमें मुझेकुछ कहना न पड़ा। शायद ही कभी उसके काममें कोई गलती निकालनी पड़ी हो। एक समय ऐसा था जब हजारों पौंडकी व्यवस्था उसके हाथमें थी और वह हिसाब-किताब भी रखने लग गई थी। उसने सम्पूर्ण रूपसे मेरा विश्वास प्राप्त कर लिया था। लेकिन मेरे लिए बड़ी बात यह थी कि मैं उसकी गुह्यतम भावनाओंको जानने योग्य उसका विश्वास प्राप्त कर सका था। अपना साथी पसन्द करनेमें उसने मेरी सलाह ली थी। कन्यादान देनेका सौभाग्य भी मुझे ही प्राप्त हुआ था। कुमारी डिक जब श्रीमती मैकडॉनल्ड बन गईं, तब उन्हें मुझसे अलग होना पड़ा, यद्यपि विवाहके बाद मी कामकी अधिकता होने पर मैं जब चाहता उनसे काम ले लेता था।
किन्तु आफिसमें एक स्थायी शार्टहैंड राइटरकी आवश्यकता तो थी ही। एक महिला इसके लिए भी मिल गई। नाम था कुमारी श्लेसिन। उसे मेरे पास लानेवाले श्री कैलनबैक थे, जिनका परिचय पाठकोंको आगे चलकर होगा। इस समय यह महिला एक हाई-स्कूलमें शिक्षिकाका काम कर रही है।[१] जब वह मेरे पास आई थी, उसकी उम्र कोई सत्रह सालकी रही होगी। उसकी कुछ विचित्रताओंसे श्री केलनबैक और मैं हार जाते थे। वह नौकरी करनेके विचारसे नहीं आई थी। उसे तो अनुभव कमाने थे। उसके स्वभावमें कहीं रंग-द्वेष तो था ही नहीं। उसे किसीकी परवाह भी नहीं थी। वह किसीका भी अपमान करनेसे डरती न थी, और अपने मनमें जिसके बारेमें जो विचार आते, सो कहने में संकोच न करती थी।[२] अपने इस स्वभाव के कारण वह कभी-कभी मुझे परेशानीमें डाल देती थी। लेकिन उसका सरल और शुद्ध स्वभाव सारी परेशानी दूर कर देता था। अंग्रेजीके उसके ज्ञानको मैंने हमेशा अपने ज्ञानसे ऊँचा माना था। इस कारण और उसकी वफादारी पर पूरा विश्वास होनेके कारण उसके द्वारा टाइप किये गये बहुत-से पत्रों पर, दुबारा जाँचे बिना ही, मैं हस्ताक्षर कर दिया करता था।
उसकी त्यागवृत्तिका पार न था। उसने एक लम्बे समय तक मुझसे प्रतिमास सिर्फ छः पौंड ही लिये, और दस पौंड से अधिक वेतन लेनेसे तो उसने अन्त तक साफ इन्कार किया। जब कभी मैं अधिक लेनेको कहता, वह मुझे डाँटती और कहती, “मैं यहाँ वेतन लेनेके लिए नहीं रह रही हूँ। मुझे आपके साथ यह काम करना अच्छा लगता है, और आपके आदर्श मुझे पसन्द हैं, इसीलिए मैं यहाँ टिकी हूँ।”
एक बार आवश्यकता होनेसे उसने मुझसे चालीस पौंड लिये थे, पर कर्जके तौर पर। पिछले साल उसने वे सारे पैसे लौटा दिये। जैसी उसकी त्यागवृत्ति तीव्र