थे। जिनके पास अधिक रकमें थीं उन्हें एक निश्चित अवधिके लिए ब्याजपर रखने की सलाह मैंने मुवक्किलोंको दी। इस प्रकार अलग-अलग मुवक्किलोंके नाम कुछ रकमें जमा की गई। इसका परिणाम यह हुआ कि उनमें से कुछ बैंक में पैसे रखनेके आदी हो गये।
बस्ती में रहनेवालोंको एक स्पेश्यल ट्रेनमें जोहानिसबर्गके पास क्लिपस्प्रूट फार्म पर ले जाया गया। यहाँ उनके लिए खाने-पीनेकी व्यवस्था नगरपालिकाने अपने खर्च से की। तम्बुओंके नीचे बसे इस गाँवका दृश्य सिपाहियोंकी छावनी-जैसा था। लोगोंको इस तरह रहनेकी आदत नहीं थी। इससे उन्हें मानसिक दुःख हुआ, नया-सा लगा। किन्तु कोई खास तकलीफ नहीं उठानी पड़ी। मैं हर रोज एक बार साईकलपर वहाँ हो आता था। इस तरह तीन हफ्ते खुली हवामें रहनेसे लोगोंके स्वास्थ्य में अवश्य ही सुधार हुआ, और मानसिक दुःखको तो वे पहले चौबीस घंटोंके अन्दर ही भूल गये। अतएव बाद में वे आनन्दसे रहने लगे। मैं जब भी वहाँ जाता, उन्हें भजन-कीर्तन और खेल-कूद में ही लगा पाता।
जैसा कि मुझे याद है, जिस दिन बस्ती खाली की उसके दूसरे दिन उसकी होली जलाई गई। नगरपालिकाने उसकी एक भी चीजको बचानेका लोभ नहीं किया। इन्हीं दिनों और इसी निमित्तसे नगरपालिकाने अपने भी बाजारकी सारी इमारती लकड़ी जला डाली और लगभग दस हजार पौंडका नुकसान सहन किया। वहाँ मरे हुए चूहे मिले थे, इस कारण यह कठोर कार्रवाई की गई थी।
खर्च तो बहुत हुआ, पर परिणाम यह हुआ कि महामारी आगे बिलकुल न बढ़ सकी। शहर खतरेसे खाली हो गया।
१८. एक पुस्तकका चमत्कारी प्रभाव
इस महामारीने गरीब हिन्दुस्तानियोंपर मेरे प्रभावको, मेरे धन्धेको और मेरी जिम्मेदारीको बढ़ा दिया। साथ ही, यूरोपीयोंके बीच मेरी बढ़ती हुई कुछ जान-पहचान भी इतनी निकटकी होती गई कि उसके कारण भी मेरी जिम्मेदारी बढ़ने लगी।
जिस तरह वेस्टसे मेरी जान-पहचान निरामिषाहारी भोजनगृहमें हुई, उसी तरह पोलकके विषय में हुआ। एक दिन जिस मेजपर मैं बैठा था उससे दूरकी दूसरी मेजपर एक नौजवान भोजन कर रहे थे। उन्होंने मिलनेकी इच्छासे मुझे अपने नामका कार्ड भेजा। मैंने उन्हें अपनी मेजपर आनेके लिए निमन्त्रित किया। वे आये।
“मैं ‘क्रिटिक’ का उप-सम्पादक हूँ। महामारी-विषयक आपका पत्र पढ़नेके बाद मुझे आपसे मिलनेकी बड़ी इच्छा हुई। आज मुझे यह अवसर मिल रहा है।”
श्री पोलककी शुद्ध भावनासे मैं उनकी ओर आकर्षित हुआ। पहली ही रात में हम एक-दूसरे को पहचानने लग गये और जीवन-विषयक अपने विचारोंमें हमें बहुत साम्य दिखाई पड़ा। उन्हें सादा जीवन पसन्द था। एक बार जिस वस्तुको उनकी