१. सत्यके प्रयोग अथवा आत्मकथा[१]
प्रस्तावना
चार या पांच वर्ष पहले निकटके साथियोंके आग्रहसे मैंने आत्मकथा लिखना स्वीकार किया था, और उसे आरम्भ भी कर दिया था । किन्तु फुलस्केपका एक पृष्ठ भी पूरा नहीं कर पाया था कि इतनेमें बम्बईकी ज्वाला प्रकट[२]हुई और मेरा शुरू किया हुआ काम अधूरा रह गया । उसके बाद तो मैं एकके बाद एक ऐसे व्यवसायोंमें फँस गया कि अन्त में मुझे यरवदाका अपना स्थान मिला।[३]भाई जयरामदास[४] भी वहाँ थे । उन्होंने मेरे सामने अपना यह आग्रह रखा कि दूसरे सब काम छोड़कर मुझे पहले आत्मकथा ही लिख डालनी चाहिए। मैंने उन्हें जवाब दिया कि मेरा अभ्यास क्रम बन चुका है और उसके समाप्त होने तक मैं आत्मकथाका आरम्भ भी नहीं कर सकूंगा । अगर मुझे अपना पूरा समय यरवदामें बितानेका सौभाग्य प्राप्त हुआ होता, तो मैं अवश्य ही आत्मकथा वहीं लिख ले सकता था । परन्तु अभी अभ्यास क्रमकी समाप्तिमें भी एक वर्ष बाकी था कि मैं रिहा कर दिया गया। उससे पहले मैं किसी भी तरह आत्मकथाका लिखना आरम्भ तक नहीं कर सकता था । इसलिए वह लिखी नहीं जा सकी । अब स्वामी आनन्दने फिर वही आग्रह किया है । मैं दक्षिण आफ्रिकाके सत्याग्रहका इतिहास[५] लिख चुका हूँ, इसलिए
- ↑ १.आत्मकथाके मूल गुजराती अध्याय धारावाहिक रूपसे नवजीवनके अंकोंमें प्रकाशित हुए थे। २९ नवम्बर, १९२५ के अंकमें प्रस्तावनाके प्रकाशनसे उसका आरम्भ हुआ और ३ फरवरी, १९२९ के अंकमे पूर्णाहुति शीर्षक अन्तिम अध्यायसे उसकी समाप्ति । अतः समग्र पुस्तक इस अन्तिम तारीखके अन्तर्गत दी जा रही है। गुजराती अध्यायों के प्रकाशनके साथ ही हिन्दी नवजीवनमें उनका हिन्दी अनुवाद और यंग इंडियामें उनका अंग्रेजी अनुवाद भी दिया जाता रहा । तद्नुसार 'प्रस्तावना ' का अनुवाद हिन्दी नवजीवनके ३ दिसम्बर, १९२५ के अंकमें प्रकाशित हुआ था। हिन्दी अनुवादमें आत्मकथा का पहला खण्ड पुस्तक के रूपमें पहली बार सस्ता साहित्य मण्डल दिल्लीसे सन् १९२८ में प्रकाशित हुआ था। गांधीजीकी रचनाओंके स्वत्वाधिकारी नवजीवन ट्रस्टने अपनी ओरसे उसके हिन्दी अनुवादका प्रकाशन सन् १९५७ में किया। उसके बाद उसकी अनेक आवृत्तियां निकल चुकी हैं। हिन्दीके सिवा संस्कृत समेत भारतको दूसरी सभी भाषाओं में भी आत्मकथा के अनुवाद प्रकाशित हुए है। इसी प्रकार दुनियाकी सारी प्रमुख भाषाओं में भी उसके अनुवाद प्रकाशित हुए हैं। देखिएकलेक्टेड चर्क्स आफ महात्मा गांधी, खण्ड ३९, ५४ १ की सम्बन्धित पाद-टिप्पणी ।
- ↑ २. १७-११-१९२१ को; देखिए खण्ड २१, पृष्ठ ४८५-८९ ।
- ↑ ३. गांधीजी १० मार्च १९२२ को अहमदाबाद में गिरफ्तार किये गये थे। उन्हें २१ मार्च, १९२२ को यरवदा जेल ले जाया गया जहांसे वे ५ फरवरी १९२४ को रिहा किये गये। देखिए खण्ड २३, १४८३ और १०१ ।
- ↑ ४. जयरामदास दौलतराम ।
- ↑ ५. देखिए खण्ड २९ ।
३९-१