११. भाषण : अस्पृश्योंकी सभा, कराची में[१]
५ फरवरी, १९२९
अस्पृश्योंने अपने अभिनन्दनपत्र में गांधीजीसे कहा था कि वे उनके लिए और सहायताकी व्यवस्था करायें। इसका उत्तर देते हुए गांधीजीने कहा कि आप लोगोंको जो सहायता प्राप्त हो चुकी है, पहले आप अपनेको उसके योग्य बनाइए, और उसके बाद आपको बिना माँगे अपने-आप आपकी जरूरतसे भी ज्यादा मिल जायेगा। उन्होंने कहा, आप शराब, जुआ, मुर्दा जानवरोंका मांस खाना छोड़िए और सफाई तथा स्वच्छताके नियमों का पालन कीजिए। यदि आप अपने अन्दर ये सुधार लानेमें सफल हो गये तो फिर आपको आगे बढ़नेसे कोई नहीं रोक सकता। आप अपने पेशेको लेकर कभी लज्जाका अनुभव न करें। मेरे विचारसे आपका पेशा बहुत भला,पवित्र और मानवजातिके अस्तित्व के लिए आवश्यक है । भंगियोंने लाला लाजपतराय स्मारकके लिए गांधीजीको एक थैली भेंट की ।
- [ अंग्रेजीसे ]
- यंग इंडिया, १४-२-१९२९
१२. भाषण : दलित' वर्गोंको सभा, कराचीमें[२]
५ फरवरी, १९२९
गांधीजीने कहा कि आप लोग राजपूतोंके वंशज[३] होने का दावा करते हैं, यह अच्छी बात है, लेकिन आप अपने आचरण द्वारा उन गुणोंको प्रदर्शित करके अपना दावा सिद्ध कीजिए जो कि शास्त्रोंने राजपूतोंमें गिनाये हैं। आप लोगोंको स्त्रियोंके प्रति सम्मान दिखाना चाहिए और निर्भीकताकी साक्षात् प्रतिमूर्ति होना चाहिए। आपमें निर्बलों और असहायोंकी रक्षा करनेकी क्षमता होनी चाहिए और जिस प्रकार आपने मुझसे सहायताकी याचना की है, उस प्रकारकी याचना आपको कभी नहीं करनी चाहिए।
- [ अंग्रेजीसे ]
- यंग इंडिया, १४-२-१९२९