सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 39.pdf/४३६

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।

२३. ग्राजकी घटना

वीमन्स इन्टरनेशनल लीग फॉर पीस ऐंड फ्रीडमकी अन्तर्राष्ट्रीय मन्त्राणीने कुमारी रोलाँको निम्नलिखित पत्र लिखा हैं :

'यंग इंडिया' के अंक ३५ में[]गांधीका एक सम्पादकीय लेख है जिसका शीर्षक है 'यूरोप जानेवालो, सावधान' । इसमें उन्होंने ग्राजकी सभाको चर्चा करते हुए हमारी लोगका अत्यन्त अनुचित ढंगसे उल्लेख किया है, जो निश्चय ही प्रो० स्टेंडेनेथके अमैत्रीपूर्ण रवैयेका परिणाम है। मैं समझती हूँ कि आपको इस सभाके बारेमें पर्याप्त जानकारी थी और आप इस दुर्भाग्यपूर्ण धारणाको सही कर सकती थीं। मैं नहीं जानती कि श्री रोमाँरोलाँके लिए गांधीको पत्र लिखकर उनकी इस सूचनाको सुधार देना सम्भव होगा या नहीं जो कि उन्हें एक ऐसे सूत्रसे प्राप्त हुई है जो हमारी लोगोके प्रति बहुत ही अमंत्रीपूर्ण रवैया रखाता है ।
मेरी समझ में इसमें कोई सन्देह ही नहीं कि ग्राजमें जो कुछ हुआ उसमें हमारी लीगका कोई दोष ही नहीं था । आस्ट्रियाके सैनिकवादके समर्थक लोग, जिनके कारण इतनी गम्भीर आशंकाएँ उत्पन्न हो रही हैं, विशेष रूपसे गत रविवारके प्रदर्शनोंको लेकर, ग्राजकी सभामें विशेष रूपसे जनरल शोनकको चोट पहुँचाने के उद्देश्यसे काफी बड़ी संख्यामें आ गये थे । सभामें भाग लेनेवाले किसी व्यक्तिने इस बातकी पहले से कल्पना नहीं की थी। इन लोगोंको स्वयं भी चोट पहुँचनेका बहुत बड़ा खतरा था । और युद्धके दौरान शान्तिवादी सभाएँ करनेवाले हम लोगोंमें से कइयोंने यह खतरा उठाया भी था। लेकिन यह निश्चय ही बड़े खेदकी बात है कि गांधी हमारे आन्दोलन के विरुद्ध प्रचार करें जो उन्हीं उद्देश्योंको सामने रखकर चल रहा है, जिनकी वे पैरवी करते हैं।
मैं समझती हूँ कि शायद इस मामलेमें किसी अन्य व्यक्तिके मुकाबले

आप और आपके भाई मामलेको ज्यादा अच्छे ढंगसे ठीक करा देंगे।


कुमारी रोलाँने यह पत्र मुझे भेजा है । मैं खुशीके साथ इसे प्रकाशित कर रहा हूँ । इस पत्र में उस सभाका उल्लेख है जिसमें गत वर्ष बाबू राजेन्द्रप्रसादपर हमला हुआ था। हालाँकि ये पंक्तियाँ (मुझे कराची ले जानेवाली ट्रेनमें) लिखते समय मेरे सामने 'यंग इंडिया' का वह अंक नहीं है, लेकिन मुझे विश्वास है कि उसमें मेरे जिस लेखका उल्लेख किया गया है उसमें लीगकी कोई आलोचना नहीं है, न कोई आक्षेप ही लगाया गया है। मैंने राजेन्द्र बाबूसे बात की थी और उनकी भी यह निश्चित

  1. १. देखिए खण्ड ३७, पृष्ठ २२७-८ ।