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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 39.pdf/४४४

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

तो जाने देना । कान्तिको धीरज तो देते ही होगे। तुमसे सारा हाल जाननेको आशा है । रसिकके अन्तिम दिनोंकी बातें जाननेका पूरा-पूरा मोह मेरे मनमें बना हुआ है । इस मोहका त्याग नहीं कर पा रहा हूँ । ।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (जी० एन० २१२२ ) की फोटो - नकलसे ।

 

३२. पत्र : बली वोराको

शनिवार [९ फरवरी, १९२९][]

चि० बली,

अच्छा किया जो तुम वहाँ पहुँच गईं। रसिक तुम्हें प्राणोंसे भी प्यारा था । मैं जानता हूँ कि हम सबसे ज्यादा दुःख तुमको ही होगा। किन्तु तुम समझदार हो । धीरज रखना । रसिककी सेवामें कोई कमी नहीं रही यह जानकर सन्तोष रखना । कुमीको अलगसे पत्र नहीं लिख रहा हूँ । यदि तुम न गई तो १७ तारीखको हम दिल्ली में मिलेंगे ।


गुजराती (जी० एन० २१५५ ) की फोटो - नकलसे ।

बापूके आशीर्वाद

३३. पत्र : कस्तूरबा गांधीको

शनिवार [९ फरवरी, १९२९][]

बा,

तुझे तो ज्ञान हो ही गया। दिल्ली जाकर तो तूने बहुत धीरज दिखाया । इसलिए मुझे लगता है कि तू शायद बहुत दुःख नहीं कर रही होगी । तूने तो इन बालकों का पालन किया था, इसलिए दुःख तो होगा ही । किन्तु जिस मार्गसे रसिक गया है, उस मार्ग से तो हम सबको ही जाना है, फिर जल्दी या देरसे जानेका शोक किसलिए करें ? दिल्ली रुक गई तो रविवार १७ तारीखको मिलेंगे ।

बापू

गुजराती (जी० एन० २१५६) की फोटो - नकलसे ।

 
  1. १ और
  2. २. रसिककी मृत्युके उल्लेखसे।