जानने की भी नहीं हो सकती । इसलिए मैं उन प्रश्नोंको गम्भीरतासे नहीं लेता । यदि अभिनन्दनपत्रके लेखककी इच्छा उत्तर जाननेकी हो, तो उसे कोई दूसरा अवसर ढूँढ़ना चाहिए ।
यंग इंडिया,२१-२-१९२९
४५. भाषण : नगरपालिका द्वारा आयोजित सभा, सक्खर में[१]
१० फरवरी, १९२९
गांधीजीका उत्तर हमारी मौजूदा नगरपालिकाओंके कार्यों और उनकी सीमाओंके विषयपर एक व्याख्यान ही था । वह अभिनन्दनपत्रमें कही गई इस बात से सहमत हुए कि नगरपालिकाओंके जरिये स्वराज्य प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन उन्होंने अभिनन्दन देनेवालोंको आगाह किया कि यह बात स्वतंत्र और स्वशासित नगरपालिकाओंकी हद तक ही ठीक है । उन नगरपालिकाओंके बारेमें यह बात सही नहीं है जो सरकारी प्रभावमें काम करती हैं, जैसा कि भारतकी ज्यादातर नगर-पालिकाओंका हाल है। लेकिन मौजूदा नगरपालिकाएँ अपने-आप सरकारसे स्वराज्य भले न ले पायें, लेकिन यदि वे कुशलतापूर्वक कार्य करें तो यह स्वराज्यकी दिशामें एक बड़ा कदम होगा । नगरपालिकाको कार्यकुशलताको पहली शर्त यह है कि जो लोग इसके सदस्य बनें उनमें निजी लाभको नहीं बल्कि सेवा करनेकी भावना होनी चाहिए। दूसरे, नगरपालिकाके सदस्योंके लिए यह जरूरी है कि वे पहले स्वयं भागी बनें और शुद्ध घी-दूध तथा अशुद्ध घी-दूधमें अन्तर करना सीखें और इस प्रकार अपने पदको योग्यता प्राप्त करें। उनका यह कर्तव्य है कि वे देखें कि नगरपालिकाकी सीमाके अन्दर एक भी गन्दी सड़क और एक भी ऐसी गली न रह जाये जहाँ झाड़ू न लगी हो ।
यंग इंडिया, २१-२-१९२९
- ↑ १. यह अंश प्यारेलाल द्वारा लिखित साप्ताहिक पत्रसे लिया गया है।