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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 39.pdf/४५९

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४६. भाषण : स्त्रियोंकी सभा, सक्खर में १० फरवरी, १९२९ अगर आप भारत में स्वराज्यकी स्थापना करना चाहती हैं, जिसका अर्थ हमारे और आपके लिए केवल रामराज्य ही हो सकता है, तो आपको मन और तन, दोनोंसे सीताकी तरह शुद्ध बनना होगा, क्योंकि तभी आप महापुरुषोंकी जननी बन पायेंगी और शारीरिक शुद्धता लानेकी दिशामें पहले कदमके रूपमें आपको शुद्ध हाथ कती खादी पहननी चाहिए जैसा कि प्राचीनकालमें सीता करती थीं । और अन्तमें, आप स्वयंको और अपनी बेटियोंको विभिन्न सामाजिक कुप्रथाओं और अत्याचारोंके उस जंजालसे मुक्त करें जो इस समय आपको जकड़े हुए हैं । [ अंग्रेजोसे ] यंग इंडिया, २१-२-१९२९ ४७. पत्र : प्रभावतीको [१० फरवरी, १९२९ या उसके पश्चात ]' चि० प्रभावती, तुमारे खत सखर में आकर मीले। मैं पिताजीको लीखता हुं वे जैसा कहेंगे वैसे हि करना । प्रत्युत्तरकी राह देखना । जी० एन० ३३१३ की फोटो नकलसे । बापूके आशीर्वाद ४८. पत्र : एगनिसको प्रिय एगनिस, २ सत्याग्रह आश्रम साबरमती ११ फरवरी, १९२९ इतने वर्षो बाद तुम्हारा पत्र पाकर मुझे बहुत खुशी हुई। हाँ, जब हेनरी' यहाँ आये थे तब उनसे तुम्हारी सभी गतिविधियोंके बारेमें मुझे जानकारी मिल गई १. गांधीजी १० फरवरी, १९२९ को सक्खर पहुँचे थे। २. इस पत्र में और इसके बादके इस कालके पत्रोंमें पत्र-व्यवहारके लिए स्थायी पता ही दिया गया था। ३. एच० एस० एल० पोलक ।