४३४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय लगता है वह सुख ही है, यह कौन कह सकता है ? भाँग पीनेमें मीठी लगती है, किन्तु उसका परिणाम तो हमें मालूम ही है । दूसरी मीठी लगनेवाली चीजोंका परिणाम हम नहीं जानते। इसलिए कई बार धोखा खा जाते हैं । तोतारामजीकी आँखोंके बारेमें लिखना, उन्हें क्या हुआ था ? गुजराती (जी० एन० ५३८८ ) की फोटो - नकलसे । बापूके आशीर्वाद ५७. पत्र : गंगाबहन वैद्यको चि० गंगाबहन, मौनवार, ११ फरवरी, १९२९ यह मैं क्या सुन रहा हूँ । छगनलालकी अनुमतिसे... ' ने तुम्हारा पत्र पढ़ लिया इसलिए तुम्हें दुःख और क्रोध क्यों हो? मैं तो यह जानता हूँ कि तुम्हें और मुझे इस जगतसे कोई भी बात नहीं छिपानी है। इसलिए अगर किसीने मेरा लिखा निर्दोष पत्र पढ़ भी लिया तो इससे तुम्हें क्रोध क्यों हो ? अब आगे सावधान रहूँगा । यह पत्र तुम्हें अलग से भेज रहा हूँ। हालाँकि छगनलालको यह बता दिया गया है कि जिस पत्रपर 'निजी' लिखा हुआ हो उसे वह अथवा दूसरा कोई भी व्यक्ति न पढ़े। फिर भी जबतक तुम मुझे आश्वस्त नहीं करतीं तबतक मैं तुम्हारा पत्र अलग लिफाफे में ही भेजता रहूँगा । तुम्हारा स्वास्थ्य अब तो बिल्कुल ठीक होगा। तुम्हारे पत्रकी आज तो प्रतीक्षा थी ही । किन्तु शायद तुमने क्रोधके कारण पत्र नहीं लिखा। अब क्रोध छोड़ दो । हम रोज प्रारम्भमें जो श्लोक गाते हैं उसे याद करना । प्रजहाति यदा कामान्' फिर हम यह भी गाते हैं, कामात् क्रोधोऽभिजायते । अपराध करे तो तुम्हें उसके कान खींचनेका अधिकार तो है किन्तु क्रोध करनेका नहीं। इसलिए सावधान रहना । टिकट बचानेके लिए आधे पत्र तुम्हारे लिफाफेमें और आधे छगनलालके लिफाफे में भेज रहा हूँ । [ गुजरातीसे ] बापूना पत्रो : गं० स्व० गंगाबहेन ने १. साधन-सूत्र में नाम नहीं दिया गया है । २. गीता, २-५५ । ३. गीता, २-६२ । ४. साधन-सूत्र में नाम नहीं दिया गया है। बापूके आशीर्वाद
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 39.pdf/४६६
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