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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 39.pdf/४६७

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चि० छगनलाल, ५८. पत्र : छगनलाल जोशीको [११ फरवरी, १९२९] अभी पुरानी डाक ही देख रहा था कि रोहड़ीसे डाक आ गई। रोहड़ीको साबरमती और सक्खरको अहमदाबाद समझो। इनकी दूरी उनसे भी कुछ कम ही है । गंगाबहनके क्रोधसे बहुत आश्चर्य हुआ है। मैंने आज ही उन्हें अलग पत्र' लिखा है। ऐसा तो होता ही रहता है । सुबह ही तुम्हें मावेके विषयमें लिखा था । अब तुमने लिखा है कि दोनोंको ही मावा नहीं चाहिए। अनसूयाबहनको मावेकी किसी अच्छी दुकानका पता मालूम है । उसके साथ प्रबन्ध कर सकते हो। यह न हो सके तो मुझे लिखना । दाममें एक आना कमी करोगे तो वह ले लेगा । अम्बालालभाईके यहाँसे दूध लें तो कोई सवाल ही नहीं रहता । फिर भी मावेकी दूकानके बारेमें जान लेना आवश्यक ही है । छोटेलालका काम तो ऐसा ही है। उसे न रख सको तो तुम असफल नहीं माने जाओगे | जो उसे रख सके उसका तो 'आनर्स ' में भी ऊँचा दर्जा समझो । दोपहरको सोनेके बाद नींद में स्वप्नमें तुम्हें देखा । तुम मेरे साथ गा रहे थे। मैंने कहा; अच्छा आता है । तुमने कहा, यह तो है, लेकिन यहाँ मुझे कोई कुछ मानता ही नहीं है । यहाँ आनेसे पहले मैं तीन बार कवियोंकी परिषदका प्रमुख चुना गया था। ठीक श्रीनगर तकसे मुझे निमन्त्रण प्राप्त हुए थे । यहाँ आते ही मेरा गर्व मिट्टीमें मिल गया और मैं कवि भी नहीं माना जाता । हम इसपर हँस पड़े; स्वप्न पूरा हो गया और नींद खुल गई । । अभी उठा हूँ तुम्हें गाना तो आश्रम में मजदूरोंसे हमारा काम ठीक नहीं चल सकता, यह तो मैं जानता ही हूँ । इस समय स्वेच्छया जिसे बन्द नहीं कर पा रहे हैं, उसे किसी दिन लाचार होकर अपनी मर्जीसे समाप्त करना चाहेंगे । इसलिए दुबारा विचार करना । किन्तु जबतक ऐसा करनेकी शक्ति दिखाई न दे तबतक जबरदस्तीसे न करना । फिलहाल एक सीमा बाँध लो, तो भी ठीक होगा। लेकिन दो सुझाव हैं । (१) वे खादी पहनें। (२) उनकी संख्या या निश्चित की हुई संख्या में वृद्धि न करें । अब्दुल्ला भाईकी याद है। अब तो वे चले गये होंगे । मोतीलालजीका तार आया है। मंगलवार तक रुकने और विट्ठलभाईके यहाँ रहने को कहा है। इसलिए पता बदल लेना और एक दिन और बढ़ा लेना । गुजराती (जी० एन० ५५६३) की फोटो - नकलसे । बापूके आशीर्वाद १. मावेकी बिक्रीके उल्लेखसे। यह स्पष्ट है कि पत्र बादमें इसी तिथिको लिखा गया था। देखिए पृष्ठ ४३३ । २. देखिए पिछला शीर्षक ।