६०. भाषण : सार्वजनिक सभा, रोहड़ीमें ' ११ फरवरी, १९२९ गांधीजीने अन्य चीजोंके अलावा श्रोताओंसे अपने बीचसे शराबखोरीके पिशाचको मार भगानेकी जोरदार अपील की। उन्होंने कहा, यदि आप यह कर दें तो इससे सरकार के पंख कट जायेंगे, क्योंकि उसको २५ करोड़ रुपये सालानाका राजस्व मिलना बन्द हो जायेगा। यह रुपया गरीबोंको जेबोंमें रहकर सुफलित होगा और इससे सरकार और जनताके सम्बन्ध भी कुछ हदतक शुद्ध बनेंगे। उन्होंने वादा किया कि शराब और विदेशी कपड़ेका बहिष्कार अहिंसाकी शुद्धतम अभिव्यक्ति है। इसमें किसीके प्रति कोई दुर्भावना नहीं है । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, २१-२-१९२९ ६१. पत्र : मीराबहनको १३ फरवरी, १९२९ चि० मीरा, मैं तुम्हें सोमवारको पत्र नहीं लिख सका, लेकिन मैं तुम्हें लगभग बराबर लिखता रहा हूँ । अतः सोमवारवाला पत्र न मिलनेकी ओर तुम्हारा ध्यान नहीं जायेगा । और रोज-रोजकी इन यात्राओंके बीच न तो तुम जानती हो और न मैं ही कह सकता हूँ कि तुम कब मेरे पत्रकी आशा कर सकती हो ? मोतीलालजीने अपने आखिरी तारमें लिखा है कि मुझे मंगलवार तक दिल्ली में रहना होगा। मंगलको मैं कहाँ जाऊँगा, मुझे पता नहीं । मेरा मन है कि मैं साबरमती या बम्बई न जाकर दिल्लीसे सीधा आन्ध्र चला जाऊँ। लेकिन मैं निश्चय करते ही तुम्हें सूचित करूंगा। दिल्ली में मेरा पता होगा - द्वारा माननीय वि० झ० पटेल, स्पीकर, दिल्ली । कैसा हत्याकाण्ड हुआ बम्बई में । इससे मेरा मन उदास हो गया है। लेकिन शायद यह अवश्यम्भावी था । देवदासने मुझे एक कवित्वपूर्ण पत्र भेजा है, जिसमें रसिकके अन्तिम दिनोंका वर्णन है । जो कुछ उसने लिखा है यदि वह सच है तो आश्रमने अपने अस्तित्वकी सार्थकता सिद्ध कर दी है। पत्रमें बताया गया है कि वह बहुत ही सात्विक और १. यह अंश प्यारेलाल लिखित साप्ताहिक पत्र में से लिया गया है।
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 39.pdf/४६९
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