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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 39.pdf/४७६

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४४ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय जन-मतको शिक्षित करने और लीग ऑफ नेशन्सके तत्वावधानमें एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने तथा ऐसे कदम उठानेकी तैयारी करना है जिससे कि इन गृह-विहीन लोगोंको कोई दर्जा प्राप्त हो सके । समितिके डायरेक्टर वाल्टर एच० फलर हैं और इसका कार्यालय ३, जनरल-वूफोरमें स्थित है । सम्पूर्ण यूरोपीय प्रणाली ही पारस्परिक अविश्वास और भयपर आधारित है । वेलेसने, जो डार्विनके समकालीन थे, ठीक ही कहा था कि पश्चिमकी आश्चर्यजनक भौतिक प्रगतिसे पश्चिमके लोगोंकी नैतिक दशामें तनिक भी अन्तर नहीं पड़ा है। कई मामलोंमें तो जो स्वतन्त्रता है उसे स्वतन्त्रता कहना गलत होगा। लेकिन यह एक शुभ लक्षण है कि बहुत बड़ी संख्या में पश्चिमके लोगोंको अपनी सभ्यताकी इस अत्यन्त चिन्ताजनक सीमाका अहसास हो गया है और वे इसे दूर करनेके लिए ईमानदारीसे प्रयत्न कर रहे हैं। इस बीच हमारी कोशिश यह होनी चाहिए कि हम हिन्द महासागरके उस पारसे आनेवाली भौतिक वैभवको चमक-दमकमें बह न जायें । हर चमकदार चीज सोना नहीं होती । 'गोधनकी दुर्दशा' स्पष्टतः ही भारतमें लोगोंकी गरीबी और उनके पशुओंकी बुरी दशाके बीच सीधा सम्बन्ध है । उड़ीसा मनुष्यकी गरीबीका जीता-जागता उदाहरण है । नागरिक पशु-चिकित्सा विभाग ( उड़ीसा रेंज) के प्रधान और असिस्टेंट डायरेक्टर, रायसाहब पी० एन० दासने कुछ दिन पहले कटक गौरक्षिणी सभाकी बैठककी अध्यक्षता करते हुए निम्नलिखित बात कही बताते हैं ? " उड़ीसा में पशुओं की स्थिति बहुत ज्यादा शोचनीय है।... लोगोंको बहुत कम दूध मिलता है । गाँवोंमें ऐसे बहुत-से लोग हैं जिन्होंने जीवनमें कभी दूधका स्वाद भी नहीं चखा और ऐसे बहुत-से गाँव हैं जहाँ एक छटाँक दूध भी उपलब्ध नहीं है । गोशालाओंके बारेमें : उन्होंने सुझाव दिया कि इस प्रकारको संस्थाओंमें आगेसे दो विभाग होने चाहिए; एक तो अपंग, बूढ़े और बेकार जानवरोंको आश्रय देनेके लिए और दूसरा पशुओंकी नस्ल सुधारने और उनको पालनेके नयेसे-नये तरीकोंको अपनानेके लिए । रायसाहबके सुझावोंका समर्थन करनेवाले काफी प्रमाण इन पृष्ठोंमें छापे जा चुके हैं। अच्छा हो कि देशकी तमाम गोशालाओंके न्यासी वक्ता द्वारा दी गई सलाहको हृदयंगम कर लें । [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, १४-२-१९२९ १. यहाँ केवल कुछ अंश ही दिये जा रहे हैं।