४४६ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय बाधक होना किसी भी रूप में जरूरी नहीं है। इसलिए मैं चाहूँगा कि इस मुद्देपर आप अपनी तरफसे मुझे सन्तुष्ट कर दें । इस बीच, चूंकि मैं अगले रविवारको दिल्ली पहुँच रहा हूँ, मैं मालवीयजीसे मिलूंगा और आपके बारेमें उनसे व्यक्तिशः बात करूँगा । मान लीजिए कि मालवीयजी आपको नहीं रख सकते, तो मैं जानना चाहूँगा कि आप अन्य किसी जगह, कहिए कि अहमदाबाद में या किसी अन्य स्थानमें जहाँ मैं आपको कोई जगह दिला सकूं, शिक्षककी जगह स्वीकार करने को तैयार होंगे या नहीं । कृपया आप मुझे विस्तारसे यह लिखिए कि आप कौन-कौनसे विषय पढ़ा सकते हैं, और यदि आपके ऊपर ही छोड़ दिया जाये तो आपकी पसन्दका विषय क्या होगा । अंग्रेजी (एस० एन० १३३१४) की माइक्रोफिल्मसे । ६७. पत्र : गंगाधरराव देशपाण्डेको हृदयसे आपका, सत्याग्रह आश्रम साबरमती १४ फरवरी १९२९ प्रिय गंगाधरराव, करना है, हालांकि तारीखें करूँगा उस समय भी मेरे भा० चरखा संघके बीच तुम्हारा पत्र मिलनेपर मैंने तुम्हें एक तार भेजा था। मैं अब देखता हूँ कि मेरे लिए फरवरी में कर्नाटकका दौरा करना असम्भव है । शायद यह जूनसे पहले सम्भव नहीं होगा। मुझे बर्मा और आन्ध्रका दौरा पहले पूरा अभी तय नहीं हुई हैं । लेकिन जब मैं कर्नाटकका दौरा लिए एकत्र चन्देकी रकमको कांग्रेस कमेटियों और अ० विभाजित करना सम्भव नहीं होगा। यह दौरा पूरी तरह खादीके लिए होगा और मेरे उस पहलेवाले दौरेकी ही कड़ी होगा जो मुझे बीचमें ही छोड़ देना पड़ा था । मेरा दृढ़ विचार है कि कांग्रेस कमेटियाँ तभी अपना नाम सार्थक कर सकती हैं जब वे अखिल भारतीय प्रतिष्ठाके लोगोंकी सहायताके बगैर धन और जन जुटा सकें । हृदयसे आपका, श्रीयुत गंगाधरराव देशपाण्डे डा० खा० हुबली बेलगाँव अंग्रेजी (एस० एन० १५३३७ ) की फोटो - नकलसे ।
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 39.pdf/४७८
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