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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 39.pdf/४८१

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भाषण : कांग्रेसकी बैठक, हैदराबाद में ४४९ है ? निश्चय ही, मैं जानना चाहूँगा कि पण्डित सन्तानम तथा अन्य लोगोंके मनमें क्या कुटिल विचार हैं? अवश्य ही, मैं डा० सत्यपालकी शक्ति, उनकी कार्य-क्षमता और निर्भीकताको जानता हूँ, लेकिन यदि इन अद्भुत गुणोंके साथ कुटिलता भी हो तो इन गुणोंका मेरे लिए कोई मूल्य नहीं रह जाता। विश्वास करो कि जहाँ वह गलती करें, वहाँ स्पष्ट शब्दोंमें उनकी गलती बता कर मैं और तुम डा० सत्यपालकी सच्ची सेवा करेंगे। मित्रके गलती करने पर उसको उसकी गलती बताने में यदि संकोच किया जाये, तो खानगी जीवनमें हो या सार्वजनिक जीवनमें, ऐसी मित्रताका कोई मूल्य नहीं है । गलत समझे जानेके भयके बिना और बिना चोट पहुँचाये गलती बता सकना मित्रताका एक विशेष अधिकार है । आपको यह पत्र डा० सत्यपालको दिखानेकी पूरी छूट है। मेरी बहुत इच्छा है कि मैं उनके साथ विस्तारसे बातचीत करूँ और फिर उनके तथा उन अन्य लोगोंके साथ संयुक्त रुपसे बातचीत करूँ जिनके साथ काम करना है वह (डा० सत्यपाल ) इतना कठिन पा रहे हैं । डा० परशुराम पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ब्रेडलॉ हाल लाहौर अंग्रेजी (एस० एन० १५२९५ ) की माइक्रोफिल्म से । हृदयसे आपका, ७१. भाषण : कांग्रेसकी बैठक, हैदराबादमें ' १४ फरवरी १९२९ गांधीजीने अपने छोटेसे भाषण में बताया कि जो समारोह होने जा रहा है उसका सच्चा महत्त्व, उसका आन्तरिक तत्त्व क्या है। उन्होंने कहा कि झंडा तो अन्ततः कपड़ेका एक टुकड़ा-मात्र होता है। इसे कोई बच्चा भी फहरा सकता है। तब फिर झंडारोहणका महत्त्व किस बातमें है ? झंडेका महत्व राष्ट्रीय सम्मानका प्रतीक होने में निहित है, इसका महत्त्व इस संकल्पमें निहित है कि अकेले होने पर भी हम इसे ऊँचा रखेंगे। अंग्रेजोंने 'यूनियन जॅक' के सम्मानको रक्षामें अपना खून पानीकी तरह बहाया है, और इसी चीजने उस झंडेको उसको वर्तमान प्रतिष्ठा प्रदान की है। इस्लामके इतिहासमें अलमबरदारके ओहदेको जो महत्ता प्राप्त है वह इस १. पद अंश प्यारेलालके साप्ताहिक पत्र में से लिया गया है। बैठक जिला कांग्रेस कमेटीके कार्यालय में हुई थी। ३९ -२९