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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 39.pdf/४८३

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७२. भाषण : छात्रोंकी सभा, हैदराबादमें' १४ फरवरी, १९२९ अपने दोषोंको स्वीकार करना सुधारकी दिशा में पहला कदम है। इसलिए आपने अपने अभिनन्दनपत्र में जिन कमजोरियों का उल्लेख किया है उनके बारेमें में कुछ नहीं कहूँगा, क्योंकि मैं मानता हूँ कि उन्हें स्वीकार करनेके बाद आप उन्हें दूर करनेके लिए कोई कसर नहीं उठा रखेंगे। मैं आपसे एक दो अन्य विवादास्पद विषयोंकी चर्चा करूँगा । इसके बाद गांधीजीने छात्रोंसे आग्रह किया कि वे अपने बोचसे शराबखोरीकी लत बिलकुल समाप्त कर दें। उन्होंने कहा कि आप शायद सोचते हों कि थोड़ी- बहुत शराब पी जा सकती है क्योंकि उससे आपको कोई नुकसान होता नहीं दिखता । लेकिन, जैसा कि 'गीता' कहती है, हमें अपना आचरण केवल अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप ही नहीं, बल्कि यह देखते हुए भी निर्धारित करना चाहिए कि उसका दूसरोंपर क्या प्रभाव पड़ेगा ।। यदि आप समझ लें कि यह खराब आदत भारतके श्रमजीवी वर्गोपर कैसा कहर बरपा कर रही है तो आप शराबको कभी हाथ न लगाने की कसम खा लेंगे। इसके बाद, गांधीजीने छात्रोंको पश्चिमके उस जहरीले साहित्यके विरुद्ध सावधान किया जो देशमें बड़ी मात्रामें आ रहा था और विज्ञानके सम्माननीय और आकर्षक चोलेमें लोगोंको शुद्धता और आत्म-संयमके पथ से विचलित करना चाहता था। उन्होंने कहा, कभी-कभी विषयोपभोगको उचित ठहरानेवाले घोषणा- पत्र जारी किये जाते हैं जिनपर बिशयों, डाक्टरों तथा अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों के हस्ताक्षर होते हैं, लेकिन आप सदाचारके सँकरे और सीधे मार्गसे अपने आपको कभी विचलित न होने दें। विषयासक्ति और नैतिक असंयम पतनका निश्चित मार्ग है। गांधीजीने छात्रोंसे अपने मन और तनको पूरी तरह शुद्ध बनानेकी अपील करते हुए कहा कि में ईश्वरसे प्रार्थना करता हूँ कि वह आपको ऐसा करनेकी सद्बुद्धि और शक्ति प्रदान करे । [ अंग्रेजी ] यंग इंडिया, २८-२-१९२९ १. यह अंश प्यारेलाल लिखित साप्ताहिक पत्रमें से लिया गया है। यह सभा सिन्धी नेशनल कॉलेजमें हुई थी जिसमें छात्रोंने गांधीजीको सिन्धीमें एक अभिनन्दनपत्र भेंट किया था। उसमें छात्रोंने बड़े ही स्पष्ट शब्दोंमें अपनी कमजोरियाँ और खामियां गिनाई थीं।