तैयारी करनेके लिए गये हैं; और १७ मार्चको तो वे धारासमासे अलग हो चुकेंगे। मन्त्रिपद से सम्बन्धित उनका काम तो गत सप्ताह में बुधवार से ही शुरू हुआ माना जा सकता है। भाई जयरामदाससे मुझे ऐसी ही आशा थी।
श्री जयरामदासके इस तत्परतापूर्ण त्यागसे यदि हम सब अपना-अपना कर्त्तव्य समझ जायें तो बहिष्कार इसी वर्ष में सफल हो जाये। मेरा यह दृढ़ मत है कि जिस कामको समस्त जनता सरलता और शीघ्रता से कर सकती है और जिसका जबर्दस्त असर होगा वह काम विदेशी कपड़ेका बहिष्कार ही है। दूसरी सब बातें व्यर्थकी झंझटें हैं। जो लोग हर बातपर सिर हिला दिया करते हैं, उनसे तो मैं यही कहूँगा 'इसे करो, और देखो'। जो बात आजमाईश करके देखी जा सकती है, उसके बारेमें केवल सिर हिला देनेका तो कुछ भी अर्थ नहीं है।
'साइमन बहिष्कार' से तो यह बहिष्कार हजार गुना अधिक कारगर है। साइमन बहिष्कार आवश्यक था। उससे कुछ जागृति हुई। परन्तु उससे प्रजाकी दरिद्रताका नाश नहीं हुआ। इस महाव्याधिको दूर करनेके लिए तो विदेशी कपड़ोंका बहिष्कार ही एकमात्र औषध है।
'नवजीवन' के पाठकोंके सामने यह कहने को तो कोई आवश्यकता ही नहीं होनी चाहिए कि यह बहिष्कार खादीको अपनाये बिना कभी सिद्ध नहीं किया जा सकता।
खादी उत्पन्न करनेवालोंको मैं यही बताना चाहता हूँ कि बहिष्कारका मूल खादीकी उत्पत्ति में ही है। खादी बिकेगी या नहीं इसका विचार किये बिना ही उन्हें तो जितनी मात्रा में जितनी अच्छी खादी उत्पन्न की जा सके उतनी करनेमें और कराने में लग ही जाना चाहिए। आज या कल, निश्चित रूपसे एक दिन जनता में ऐसा जोश आयेगा कि सब खादीकी ही माँग करेंगे। खादी उत्पन्न करनेवाले यदि उस समय उस माँगको पूरी न कर सकेंगे तो उन्हें अपना सिर नीचा करना पड़ेगा। ऐसी नौबत उन्हें नहीं आने देनी चाहिए।
- [गुजरातीसे]
- नवजीवन, ३-३-१९२९
६७. 'आदतन खादीधारी' किसे कहें?
कांग्रेस के रचनात्मक कार्यक्रमपर अमल करनेकी थोड़ी-बहुत इच्छा सभीको है। यह कोई नई बात नहीं है कि यह इच्छा गुजरातमें विशेष रूपसे है। इस स्थितिमें यदि कार्यकर्त्ता खादी पहननेसे सम्बन्धित धाराका स्पष्टीकरण चाहें, तो उनकी यह बात समझमें आती है।
कांग्रेसके संविधानके अनुसार जो खादी न भी पहनता हो ऐसे व्यक्तिको भी कांग्रेसका सदस्य बननेका अधिकार है और उसे सदस्य बननेसे कोई रोक नहीं सकता। किन्तु इस तरह बना हुआ सदस्य खादी पहनने वाला न हो तो वह कांग्रेस या उसकी समिति या उपसमितिमें बिलकुल भाग नहीं ले सकता। वह न बोल सकता है, न मत