भूमिका
इस खण्डमें १५ फरवरीसे ३१ मई, १९२९ तककी अवधिकी सामग्रीका समावेश है। इस अवधिमें गांधीजी मुख्य रूपसे स्वराज्य-संग्रामकी तैयारीके तौर पर खादीका प्रचार-कार्य करने और विदेशी-वस्त्र-बहिष्कार-आन्दोलनको संगठित करनेके काममें व्यस्त रहे। स्वराज्यके लिए संघर्ष आरम्भ करनेका निश्चय दिसम्बर १९२८ में कांग्रेसके कलकत्ता-अधिवेशनमें किया गया था। कांग्रेस कार्य-समितिने १७ फरवरीको दिल्लीमें हुई अपनी बैठकमें चार घंटेकी बहसके बाद बहिष्कार-सम्बन्धी गांधीजीकी योजनाको स्वीकार कर लिया था और उनकी अध्यक्षतामें विदेशी-वस्त्र-बहिष्कार-समितिकी स्थापना की गई थी। गांधीजीने सिंधके प्रमुख कांग्रेस कार्यकर्त्ता श्री जयरामदास दौलतरामको बम्बई विधान-सभाकी सदस्यतासे त्यागपत्र देकर समितिका बाकायदा मंत्री बननेके लिए निमंत्रित किया। एक सुविस्तृत योजना बनाई गई और गांधीजी ने देशके लोगोंसे इस योजनापर जोशके साथ अमल करनेकी अपील की। उन्होंने खादी तथा अन्य रचनात्मक कार्योंके लिए धन इकट्ठा करनेके उद्देश्यसे मार्चमें बर्माकी यात्रा की और विदेशी वस्त्रके बहिष्कारका अपना सन्देश वहाँ भी लोगोंको दिया। अप्रैल-मईमें उन्होंने आन्ध्रका व्यापक दौरा किया। वे वहाँ दूर-दूर तकके गाँवोंमें गये और लाखों गाँववालोंके सामने अपनी बातें रखीं।
गांधीजी विदेशी-वस्त्रके बहिष्कारको अंग्रेजोंके विरुद्ध इस्तेमाल किया जानेवाला कोई राजनीतिक अस्त्र नहीं मानते थे, बल्कि वे उसे देशमें फैली चिरकालिक बेरोजगारीको दूर करने और करोड़ों क्षुधाग्रस्त लोगोंके लिए स्वराज्य प्राप्त करनेका साधन मानते थे (पृष्ठ ८१)। उन्होंने हर व्यक्तिसे अपनी सामर्थ्य भर प्रयत्न करनेको कहा : "कोई स्त्री या पुरुष अपने वैयक्तिक प्रयासका महत्व कम न समझे। पूर्ण बहिष्कार वैयक्तिक प्रयत्नोंका योग ही तो है।... देशव्यापी पैमाने पर अगर कभी कुछ हुआ तो वह वैयक्तिक प्रयासोंके परिणामस्वरूप ही होगा" (पृष्ठ ४७-८)।
विदेशी कपड़ेकी सार्वजनिक होली जलानेका कार्यक्रम फिरसे आरम्भ किया गया और ४ मार्चको कलकत्ताके श्रद्धानन्द पार्कमें गांधीजीने स्वयं भी पुलिसके नोटिसकी अवहेलना करते हुए विदेशी कपड़ोंकी एक होली जलाई। नोटिसमें कहा गया था कि विदेशी-वस्त्रोंकी होली जलाना कानूनन अपराध माना जायेगा। गांधीजीने कानूनकी इस व्याख्याको स्वीकार नहीं किया और जब अदालतमें उनके विरुद्ध अभियोग लगाया गया तब उन्होंने वहाँ भी वही बात दोहराई जो उन्होंने सभामें विस्तारपूर्वक समझाई