कमिश्नरका सौजन्य मानता हूँ कि उन्होंने मुकदमेकी सुनवाई कल ही करनेका आग्रह नहीं किया और मेरे बर्मासे लौट आनेतक उसे रोक दिया है। उनका यह आशा करना उचित ही था कि जबतक इस मामलेका फैसला न हो जाये तबतक मैं वचन दूँ कि कलकत्तेके सार्वजनिक मैदानोंमें विदेशी कपड़ोंकी होली नहीं जलाई जायेगी। स्थानीय कांग्रेसी मित्रोंके साथ सलाह करनेके बाद मैंने यह वचन पहले ही दे दिया है और मैं आशा करता हूँ कि जनता इस वचनका ईमानदारीसे पालन करेगी।
तथापि मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि इसके अर्थ बहिष्कारके सिलसिले में प्रदर्शन करना, विदेशी कपड़ोंको इकट्ठा करना या उनकी होली जलाना भी कदापि नहीं है। इस वचनका धर्म इतना ही है कि पुलिस अधिनियमके इस खण्ड विशेषकी अधिकृत व्याख्या न हो जानेतक कलकत्ताके सार्वजनिक मैदानोंमें और स्वभावतः सार्वजनिक सड़कोंपर कपड़ोंकी होली नहीं जलाई जायेगी। लेकिन जब भी जरूरी माना जायेगा, और जब भी कांग्रेसके अधिकारी वैसा निर्णय करेंगे, तब वे इकट्ठा किये गये विदेशी कपड़ेको निजी स्थानोंपर या ऐसे स्थानोंपर जलानेमें नहीं हिचकेंगे जो उक्त खण्डकी पुलिस द्वारा की गई व्याख्याके अन्तर्गत नहीं आते।
श्रद्धानन्द पार्क में आयोजित प्रदर्शन में पुलिस द्वारा अनुचित और अनावश्यक हस्तक्षेप करनेके बाद भी यदि सभी लोग विदेशी कपड़ेका त्याग न कर दें और बहिष्कारको पूर्णतः सफल न बना दें तो मुझे वास्तवमें ताज्जुब होगा। पुलिस-हस्तक्षेपका सबसे कारगर जवाब यह होगा कि नगरेतर क्षेत्रोंमें रहनेवाले लोग और अन्य प्रान्तोंके लोग जो भी विदेशी कपड़ा उपलब्ध हो उसे इकट्ठा करके आगमें झोंक दें। विदेशी कपड़ोंको जलानेके प्रश्नपर मैंने काफी गहराईसे चिन्तन किया हैं। मैं जानता हूँ कि कुछ मित्र मुझसे भिन्न राय रखते हैं, किन्तु यदि यह बात सत्य है कि विदेशी कपड़ोंका आयात हमारे देशके साधनोंको यहाँसे बाहर ले जानेका सबसे बड़ा साधन है और इसके कारण करोड़ों क्षुधा ग्रस्त लोग विवश होकर कंगालीका जीवन व्यतीत कर रहे हैं, तब यह विदेशी कपड़ा, जिसमें ऐसे विषैले कीटाणु लगे हुए हों, इसी लायक है कि उसे नष्ट कर दिया जाये।
- [अंग्रेजीसे]
- फॉरवर्ड, ५-३-१९२९ और यंग इंडिया, १४-३-१९२९