वहाँ खादीकी प्रगति कैसी है इसका समाचार दिया करो। देखता हूँ कि दर्जी सम्बन्धी तुम्हारे सुझावसे बहुत-कुछ हो सकता है। किन्तु उसमें भी लोगोंमें प्राण फूँकनेके लिए एक मनुष्यको तो खपना ही पड़ेगा। कई पत्र मेरे पास आये तो हैं किन्तु मैं उनका उपयोग किस प्रकार कर सकता हूँ?
मैं इस मासके अन्त में आश्रम लौटूँगा; और उसके साथ ही आन्ध्रकी यात्रा शुरू हो जायेगी।
बापूके आशीर्वाद
गुजराती (जी॰ एन॰ ३७२९) की फोटो-नकलसे।
७९. आगामी आन्ध्र-यात्रा
मेरे काबूसे बाहरकी परिस्थितियोंके कारण आन्ध्र देशके मित्रोंको जो बार-बार निराश होना पड़ा है, आशा है, इसके लिए वे मुझे क्षमा कर देंगे। अगर हो सकता तो मैं खुशी-खुशी इससे पहले हो आन्ध्र देशकी यात्रा कर लेता। अब मैं अगले महीने की शुरुआत में आन्ध्र पहुँचनेकी आशा रखता हूँ। अभीसे जो कार्यक्रम तय हो चुका है वह पहली अप्रैलको काठियावाड़में समाप्त हो जायेगा। मैं एक या दो दिन उद्योग मन्दिरमें ठहरूँगा और शीघ्र ही वहाँसे आन्ध्रके लिए चल दूँगा। इस हिसाब से मैं करीब ५ या ६ अप्रैलको बम्बईसे आन्ध्रके लिए रवाना हो जाऊँगा। १४ मईको इलाहाबाद में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटीकी बैठक है, जिसमें मेरा हाजिर रहना जरूरी है। इस कारण आन्ध्रमें मुझे एक महोनेसे कुछ ही ज्यादा समय मिलेगा। मैं चाहता तो था कि मुझे इस कामके लिए अधिक समय मिलता, लेकिन लाचार हूँ। फिर भी सुन्दर व्यवस्थाके जरिये एक महीने के समय में भी बहुत-कुछ काम किया जा सकता है।
मेरी यात्राका खास हेतु तो खादी ही रहेगा, लेकिन मैं लालाजी स्मारकके लिए मिलनेवाली रकमका भी स्वागत करूँगा और इसके लिए चन्देकी माँग करूँगा। इस भीख माँगने के कामके अलावा मैं कांग्रेसके रचनात्मक प्रस्तावके सिलसिले में कुछ सक्रिय प्रचार करनेका मी इरादा रखता हूँ, खासकर उस बहिष्कार योजनाके प्रचारका जो कार्य समितिने तैयार की है। अगर आन्ध्र देश बहिष्कार आन्दोलनमें पूरे उत्साह के साथ हाथ नहीं बँटायेगा तो मुझे खेद और आश्चर्य होगा। आन्ध्रवासियोंको सुन्दर खादीकी कोई शिकायत नहीं है। उनमें मोटी या महीन खादी तैयार करनेकी अनन्त शक्ति भरी पड़ी है। वे बहुत-सा कपास पैदा करते हैं। उनके पास योग्य कार्यकर्त्ता भी हैं और देशभक्तिकी लगन में वे किसी भी प्रान्तसे पीछे नहीं हैं। बात केवल इतनी है कि उनमें नेता तो जरूरत से ज्यादा हैं लेकिन अनुयायी मात्र इनेगिने हैं। उनमें बहुमुखी प्रतिभा होनेसे आपसमें छोटी-मोटी ईर्ष्या और कलह उत्पन्न हो गया है। क्या यह आशा करना बहुत ज्यादा होगा कि मेरे आन्ध्र देश पहुँचनेके पहले ही वे अपनी-