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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/१३०

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

संख्याका झंडे में दूसरा नम्बर है। चरखा झंडेके बीचोंबीच इस तरह बनाया जाये कि वह तोनों रंगों को छूता रहे।

कार्यसमितिकी पिछली बैठक में झंडेके बारेमें अनौपचारिक ढंगसे चर्चा हुई थी। मैंने समितिका ध्यान झंडे सम्बन्धी अनियमितताओंकी ओर खींचा था और यह भी बतलाया था कि राष्ट्रीय झंडेकी विशेषताओंकी व्याख्या करनेवाला कोई भी प्रस्ताव न तो कार्यसमिति में ही उठाया गया है और न अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटीमें हो। इसपर सदस्योंकी जो राय मालूम पड़ी वह यह थी कि झंडेमें तीन रंग हों। उसमें चरखा बना हो और झंडा खादीका हो। ये तीनों चीजें इतनी बद्धमूल हो गई हैं कि अब करीब-करीब उसने नियमका रूप धारण कर लिया है और जो कोई किसी दूसरे ढंगका झंडा बनाता या काम में लाता है, स्पष्ट ही उस नियमके भंगका दोषी है।

इस स्थितिको देखते हुए मैंने सुझाया है कि कांग्रेसकी ओरसे विभिन्न आकारके झंडे तैयार कराये जायें और देश-भरके भंडारोंमें बिक्री तथा प्रचारके लिए रखे जायें। इस तरह सही ढंगके और सस्ते झंडे सुलभ हो जायेंगे। सबसे सरल और लाभदायक तरीका तो यह है कि अखिल भारतीय चरखा संघ ऐसे झंडे तैयार कराये और कांग्रेसकी ओरसे उन्हें अपने भण्डारों में बिक्रीके लिए रखे। चूँकि किसी भी कांग्रेस कमेटीका अखिल भारतीय चरखा संघसे सस्तेपन में स्पर्धा करना असम्भव है इसलिए सारे भारत में इन झंडोंकी बिक्री खूब बढ़ सकेगी। इसमें हमें यह बात पहले ही से मान कर चलना पड़ेगा कि राष्ट्रीय जागृतिका आरम्भ हो चुका है और तमाम कांग्रेसवालों द्वारा तथा कांग्रेस संगठनों द्वारा झंडेकी शुद्धताका पूरा-पूरा खयाल रखा जाता है।

[अंग्रेजीसे]
यंग इंडिया, ७-३-१९२९
 

८६. विदेशी कपड़ोंका बहिष्कार

मेरे लिए यह अत्यन्त हर्षका विषय है और मुझे आशा है कि हर राष्ट्रप्रेमीको इस बात से खुशी होगी कि श्रीयुत जयरामदासने विदेशी कपड़ा बहिष्कार समितिकी ओरसे किये मेरे आह्वानपर इस समितिका मन्त्री पद बड़ी तत्परता से स्वीकार कर लिया है, और उन्होंने बम्बई विधान परिषद्की सदस्यता त्याग दी है जो कि वैसा करनेके लिए जरूरी था। जयरामदास उन लोगों में से हैं जो कोई काम तबतक नहीं उठाते जबतक उसमें उनका विश्वास न हो। इसलिए इस आन्दोलनमें पूरा समय देनेका उनका फैसला मेरी रायमें इस आन्दोलनको एक बहुत बड़ा लाभ है। यदि जनता भी विदेशी कपड़ा बहिष्कार समिति द्वारा समय-समयपर किये जानेवाले आह्वानोंका इसी तत्परता से जवाब देगी तो सारा देश कुछ ही महीनोंके अन्दर निश्चित प्रगति दिखा सकेगा। बहिष्कारको जनताका संकल्प-बल प्राप्त हो तो केवल सावधानीके साथ संगठन करनेकी ही जरूरत रह जाती है।