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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/१३७

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९२. एक पत्र[]

एस॰ एस॰ 'एरोंडा'
७ मार्च, १९२९

प्रिय मित्र,

आपका पत्र मिला। आपके प्रश्नोंका सबसे अच्छा उत्तर यही है कि यथासम्भव कमसे कम और वे भी अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखनेके लिए अत्यावश्यक चीजें कमसे-कम मात्रामें ली जायें। अपने आहारकी वस्तुओंका चुनाव करनेमें उन चीजोंको ही लीजिए जो मनुष्यके लिए स्वाभाविक हैं और जहाँतक सम्भव हो उन्हें कच्चा ही खाइए।

आपको यह सूचना गलत दी गई कि मैंने पूनामें ब्रांडी ली थी। मैंने जीवन में कभी नहीं ली है।

मुक्त पुरुषकी स्थिति पूर्ण आनन्दको स्थिति है, जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता।

हृदयसे आपका,
मो॰ क॰ गांधी

अंग्रेजी (एम॰ एम॰ यू॰/२२/६५) की माइक्रोफिल्मसे।

 

९३. पत्र : नारणदास गांधीको

रंगून जाते हुए स्टीमरपरसे
७ मार्च, १९२९

चि॰ नारणदास,

रामविनोदका मामला मुझे अभी देखना है। उसके विषयमें तुमने जो जाँच की हो या जो कुछ मालूम हुआ हो उसका ब्योरा मुझे लिख भेजना। कलकत्ताके पतेसे भेज देना ही काफी होगा। मैं २४ तारीखको जीवनलालभाईके यहाँ ८, प्रिटोरिया स्ट्रीट, कलकत्ता, पहुँचूँगा; इसलिए ध्यान रहे कि पत्र वहाँ २३ को पहुँच जाये। तुम्हें जाँचमें क्या-क्या करना पड़ा सो भी लिखना।

पुरुषोत्तम मजे में है। वही मुझे रोज 'गीता' सुनाता है। समुद्र काफी शान्त इसलिए दो-तीन दिनकी यात्रासे जितना लाभ मिल सकता है, मिल रहा है।

  1. प्रेषीका नाम ज्ञात नहीं है।