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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/१४१

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भाषण : रंगूनकी सार्वजनिक सभामें

गर्वका अनुभव करना चाहिए--जैसा कि मैंने कराची नगरपालिकाके सदस्योंसे कहा भी था। हमारी मातृभाषामें नगरपालिकाके लिए एक शब्द है। हम नगरपालिकाको 'कचरापट्टी' कहते हैं जिसका मतलब है, भंगी गाड़ी। उस नगरपालिकाका होना न होना बराबर है जो किसी नगरके सार्वजनिक और सामाजिक जीवनके सभी अंगोंको समाहित करनेवाला प्रमुख भंगी विभाग नहीं है, जो भंगीका काम करनेकी भावनासे ओतप्रोत नहीं है, जो नगरकी बाहरी सफाई ही नहीं, नागरिकोंकी आन्तरिक स्वच्छताका भी ध्यान नहीं रखती।

भारत में अपने भ्रमण के दौरान मुझे बहुत-सी नगरपालिकाओंने अभिनन्दनपत्र दिये और उनके उत्तरमें मैंने उनको बताया है कि जबतक कोई नगरपालिका अपने क्षेत्रके सभी बच्चोंको जाति, धर्म, या रंगका कोई भेद किये बिना, उनके सामाजिक दर्जीका भेद किये बिना प्रारम्भिक शिक्षा नहीं प्रदान करती, जबतक वह अपने क्षेत्रके सभी निवासियोंके लिए सस्ता और शुद्ध दूध उसी प्रकार सुलभ नहीं करती जिस प्रकार कि आपको डाकके टिकट सुलभ हैं तबतक उसे नगरपालिका कहलानेका कोई अधिकार नहीं है। रंगून-जैसे महानगरके लिए अपने नागरिकोंकी इन बुनियादी आवश्यकताओंको पूरा कर सकना, जिनपर यदि सब नागरिकोंका नहीं तो कमसे-कम वृद्धजनों और बच्चोंका स्वास्थ्य काफी निर्भर करता है, उसके सामर्थ्यसे बाहरकी बात तो नहीं होनी चाहिए। ईश्वर करे कि आपके नगरको भारतमें, या कहूँ तो पूर्वके देशोंमें वह सबसे पहला नगर होनेका गौरव प्राप्त हो जहाँ नागरिकोंके लिए सस्ता, शुद्ध और बिना मिलावटका दूध उपलब्ध किया गया हो।

आपने मुझे यह अभिनन्दनपत्र देकर मेरा जो सम्मान किया है उसके लिए मैंने आपको धन्यवाद दिया है और एक बार फिर देता हूँ और मेरा जो सम्मान यहाँ किया गया है, उसे देखनेके लिए यहाँ आनेवाले इस विशाल श्रोता-समूहको भी मैं धन्यवाद देता हूँ। मैं आशा करता हूँ कि मैं अपने जीवनमें कभी कोई ऐसा काम नहीं करूँगा जिसके कारण आपको मुझ जैसे तुच्छ व्यक्तिको सम्मानित करनेके अपने निश्चयपर खेदका अनुभव हो।

[अंग्रेजीसे]
हिन्दुस्तान टाइम्स, ११-३-१९२९