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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/१४९

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भाषण : गुजरातियोंकी सभा, रंगूनमें

उन्होंने अपने बालकोंके लिए कितनी सुविधाओंका प्रबन्ध कर रखा है! दार्जिलिंग और शिमला जैसे स्थानोंमें बड़े-बड़े विद्यालय खोल रखे हैं। अपने बच्चोंकी शिक्षाके लिए वे अपार धन खर्च करते हैं। आप भी अपने बच्चोंके लिए ऐसी शाला खोलें जहाँ वायु शुद्ध हो और उन्हें स्वच्छताका पदार्थ-पाठ मिले। आपका विद्यालय किसी ऐसे ही स्थानपर बनाया जाना चाहिए।

गुजरात से बाहर रहनेके कारण आप लोगोंकी जिम्मेदारी तो दुगुनी हो जाती है। यहाँ बहुत से काठियावाड़ी हैं। 'मधुसे भी मीठे लोग यहाँ देखे हैं' नवलरामकी इस उक्ति में सत्यता तो है पर उसमें ध्वनित पारस्परिक झगड़े और खुशामद आदि जो खराब आदतें हममें हैं, उन्हें छोड़कर ही हमें बाहर निकलना चाहिए। हम गुजरात में जब अपने समाजके बीच रहते हैं तो वहाँ समाज बड़ा होनेके कारण हमारे बहुत-से दोष छिप जाते हैं। यहाँ इस छोटे-से समुदाय में हमारे दोष तुरन्त सामने आ जाते हैं। विदेश में लोग किसी समाजके एक ही व्यक्तिसे पूरी जातिको तौलते हैं। किन्तु जिस तरह एन्ड्रयूज जैसा मनुष्य हिन्दुस्तान में आकर अंग्रेजोंके दोषोंको छिपा देता है, उसी तरह आप भी अपने दोषोंको त्यागकर अपने गुणोंकी सुगन्ध फैलायें। आप तो गुजरातके ही नहीं, भारत-भरके प्रतिनिधि हैं। ब्रह्मदेश भारतका भाग नहीं है। जिसे हम भारतवर्ष मानते हैं यह उसका हिस्सा नहीं है। आप यहाँ विदेशीकी तरह आते हैं तो दूधमें चीनीकी तरह घुलमिल जायें। आपको अपना जीवन पवित्र बनाना चाहिए और आपके आचरण में ऐसी कोई बात नहीं होनी चाहिए जो किसीको खटक सके।

क्या आप यह मानते हैं कि व्यापार में ईमानदारीसे चलकर कमाई नहीं हो सकती है? व्यापार में नीतिसे काम नहीं लिया जा सकता, यह केवल भ्रम है। इसके मेरे पास काफी उदाहरण हैं। जमनालालजीका ही उदाहरण लें। लगभग बारह वर्षसे ज्यादा समयसे वे मेरे सम्पर्क में हैं। वे मानो तटस्थ खड़े रहकर मुझे देखते-समझते और मेरे द्वारा किये गये परिवर्तनोंका निरीक्षण करते रहे हैं। वे अत्यन्त बुद्धिमान व्यक्ति हैं, दूसरोंकी हलचलों पर निगाह रखने आदिका अत्यन्त विचारपूर्वक काम करनेवाले मनुष्य हैं। उन्होंने अपना व्यापार किस प्रकार पूर्णतया शुद्ध रखा है, उसकी साक्षी मैं दे सकता हूँ। इसी प्रकार एक प्रातःस्मरणीय नाम उमर हाजी आमद झवेरीका भी है। यह नहीं कहा जा सकता कि इस व्यक्तिके पास सदा पैसा रहा हो, किन्तु आज तो उसके पास लाखोंको सम्पत्ति है और मैं जानता हूँ कि उन्होंने कभी बेईमानीसे पैसा नहीं कमाया। इस प्रकार मैं कह सकता हूँ कि नीतिका मार्ग अपनानेवाला व्यक्ति करोड़पति भले न बन पाये, लखपति तो बन ही सकता है।

हिन्दू-मुस्लिम प्रश्नसे सम्बन्धित मेरे व्यवहारके विषय में बहुत-से लोगोंको शंका है। बहुत-से लोग यह भी मानते हैं कि अली-भाइयोंका साथ और उनको प्रोत्साहन देकर मैंने भारी भूल की है। किन्तु आज भी मुझे उनके साथ सम्बन्ध जोड़नेका पश्चात्ताप नहीं है। मैं जिनके साथ मित्रता करता हूँ उनसे किसी तरहका सौदा नहीं करता। मित्रता सौदा नहीं है, वह तो एकपक्षीय व्यवहार है। बदला चाहनेवाला व्यक्ति मित्र नहीं माना जा सकता। जिस मनुष्यकी रात-दिन अहिंसाका पालन करनेकी