यह एक करोड़ रुपया मेरे पास नहीं आया। अनेक मारवाड़ियोंने अपना और भी पैसा अमानतके रूप में रखा था और उसका न्यास बना दिया गया था। रामनारायण सेठके न्यासका पैसा अब भी मौजूद है। बैरिस्टर जयकर और उमर सोबानीने पच्चीस-पच्चीस हजार रुपया दिया था, वह 'इंडिपेंडेंट' के लिए दे दिया गया। देशबन्धुने पन्द्रह लाख रुपया भेजनेका वचन तार द्वारा दिया है। यह बात मैंने तारको ठीक न पढ़नेके कारण समझ ली थी। उन्हें तो नकद पाँच लाख रुपये भी प्राप्त नहीं हुए थे। पंजाबका पैसा लालाजीने पंजाब में ही रख लिया था। यह तो मैंने मोटी-मोटी बातें बताईं। गुजरातियोंने इस कोषके लिए काफी धन दिया था। बम्बईके पैसेके लिए मैंने बम्बई में ही न्यासी नियुक्त कर दिये थे। यह पैसा आज भी न्यासियोंके हाथमें है। बम्बईका कांग्रेस भवन इसी कोषके धनसे बनवाया गया है। कांग्रेसका कार्यालय भी आज इसी निधिसे चलाया जा रहा है। कांग्रेसने जो लाखों रुपया खर्च किया है, उसका पाई-पाईका लिखित हिसाब है। उस एक-एक पाईका ठीक-ठीक उपयोग हुआ है या नहीं, यह तो मैं नहीं कह सकता। हर प्रान्तने अपना धन जैसा ठीक लगा, वैसे खर्च किया। पर इसमें किसीने पैसा खाया नहीं है या अपने किसी सम्बन्धीको नहीं दिया है और उसका पूरा हिसाब सुरक्षित है।
मैं आज उससे भी बड़ा व्यापार कर रहा हूँ। याद रखिए कि खादीका व्यापार इतना बढ़ेगा कि जिस तरह लोग शरीरसे चींटी झाड़ देते हैं वैसे ही विदेशी कपड़ा झाड़ देंगे। चरखा संघका हिसाब तो आप जिस समय माँगें उसी समय मिल सकता है। उसकी व्यवस्था जमनालाल और शंकरलाल बैंकरके हाथमें है। वे इतने सावधान हैं कि यदि मेरा मन कहीं भी पैसा खर्चने या देनेका हो तो वे मुझे रोकते हैं। पैसोंका हेर-फेर करनेवाले या पैसा खा जानेवाले कार्यकर्त्ता हमें नहीं मिले, ऐसी बात नहीं है। हमारे कार्यकारी मण्डलके लोगों में हजारमें से एक खोटा हो सकता है। किन्तु खादीका काम तो जग जाहिर है। यदि आप बारडोलीसे सम्बन्धित लेखोंको पढ़ते रहे हैं तो आप जानते ही होंगे कि खादीके आसपास कितना सुन्दर कार्य हो रहा है। खादी के प्रतापके बिना वल्लभभाई कभी बारडोली सत्याग्रह न कर पाये होते; किन्तु आज हमें खादीका व्यापक प्रचार करना है और उसका सन्देश घर-घर पहुँचाना है।
मैं यह भी चाहता हूँ कि आप गो-सेवाकी प्रवृत्ति में भी रुचि लें। आज हमारी स्थिति यह है कि हम शुद्ध जूता[१] तैयार कर सकते हैं जिसे पहनकर मन्दिर जाने में भी कोई आपत्ति नहीं है। आप इस प्रवृत्तिमें दिलचस्पी लें और सच्ची गोरक्षा करें। आज ये बहुत सी बातें मैंने आपसे कहीं; अभी और भी बातें कही जा सकती हैं। किन्तु यह याद रखना चाहिए कि मैंने ये सब बातें आपको इन कामों में खींचनेकी दृष्टिसे ही कही हैं।
- [गुजरातीसे]
- नवजीवन, २४-३-१९२९
- ↑ मरे हुए ढोरकी खालका बना हुआ जूता।