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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/१५८

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

इस पावन पुण्य स्थलीमें इतने सारे फुंगियों और श्रोताओंके इतने विशाल समुदायको देखकर निस्संदेह मनको बड़ी प्रेरणा मिलती है और यदि दिनभरको थकानने मेरे शरीर में तनिक भी शक्ति छोड़ी होती तो मैं इस प्रेरणाके बलपर काफी लम्बा भाषण देता। परन्तु अपने फुंगी मित्रोंसे मैं इतना तो अवश्य कहूँगा कि संसारके समस्त पुरोहित वर्गके साथ ही आप लोगोंको भो संसारकी जनता निरन्तर कसौटी पर कस रही है। आपकी यह बात सुनकर मुझे खुशी हुई कि बर्मामें फुंगी लोग एक राजनीतिक आन्दोलनका नेतृत्व कर रहे हैं, पर यह याद रखिये कि राजनीतिक संघर्ष के नेतृत्वका दायित्व अपने कंधोंपर लेना अपने-आपमें एक अत्यन्त गम्भीर दायित्व है। इतिहास बतलाता है कि राजनीतिक मामलोंमें पुरोहित वर्ग द्वारा किया गया हस्तक्षेप सदा ही मानवताके हित में नहीं रहा है। बहुधा यही हुआ कि संसारके पुरोहित वर्गने ठीक उसी भाँति किसी अवांछनीय महत्वाकांक्षाके वशीभूत होकर राजनीति में भाग लिया है जैसे नैतिकताहीन व्यक्ति अपने स्वार्थवश राजनीति की ओर प्रेरित होते हैं। इसलिए अब यदि आप कुंगी सम्प्रदायके पुरोहित संसारके इस एक सुन्दरतम प्रदेशके राजनीतिक आन्दोलनका नेतृत्व करनेको इच्छुक हैं, तो स्पष्ट है कि आप अपने ऊपर एक भारी दायित्व ओढ़ने जा रहे हैं। मैं आपसे कहता हूँ कि आपके लिए यहीं काफी नहीं है कि आप इतने शुद्ध-पवित्र रहें कि कोई आपपर शंका तक न करे, आपको तो निष्कलंक पवित्रताके साथ ही साथ अपने अन्दर अत्यन्त ही ऊँचे किस्मकी बुद्धिमत्ता और योग्यता भी पैदा करनी पड़ेगी। यदि बर्माकी समूची जनता आपके आह्वानपर आगे बढ़कर आपका पूरा-पूरा समर्थन करने लगे तो भी यह एक शर्त तो आपको पूरी करनी ही पड़ेगी। हम लोग यहाँ भगवान बुद्धकी छाया में बैठे हैं। इस आन्दोलनसे सम्बन्धित प्रत्येक व्यक्तिको उनका मार्गदर्शन प्राप्त हो।

इस प्रदेशमें अपनी उपस्थितिसे इस सभा-स्थलीकी शोभा बढ़ाने और मेरे पैर रखते हो हर जगह स्नेहपूर्वक मेरा स्वागत-सत्कार करनेके लिए मैं आपका आभारी हूँ। मेरी कामना है कि बर्माकी सरल हृदय जनताका भविष्य मंगलमय हो।[]

[अंग्रेजीसे]
यंग इंडिया, २८-३-१९२९
  1. यह अनुच्छेद अमृतबाजार पत्रिकासे लिया गया है।