यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
१३४
सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय
प्रिवाका[१] एक पत्र मुझे मिला है। यहाँ जो भी कुछ हो रहा है, उससे यही सिद्ध होता जा रहा है कि इस वर्ष यूरोप न जानेका मेरा निर्णय कितना बुद्धिमानीका था। वास्तवमें उपयुक्त समय आनेपर अन्तरात्मासे स्पष्ट आवाज उठेगी और मार्ग भी सामने खुल जायेगा।
सस्नेह,
बापू
[पुनश्च :]
मैंने तुमको बतलाया या नहीं कि जाकिर हुसैन मेरे साथ ही है। मैं उससे जितना अधिक परिचित होता जाता हूँ उतना ही अधिक उसको पसन्द करता जाता हूँ। सब ठीक चल रहा है।
- अंग्रेजी (जी॰ एन॰ ९४०५) से; तथा सी॰ डब्ल्यू॰ ५३४९ से भी।
- सौजन्य : मीराबहन
१११. पत्र : आश्रमकी बहनोंको
रंगून
मौनवार [११ मार्च, १९२९][२]
बहनो,
आज तो तुम्हें याद करने जितना ही समय मेरे पास है।
तुम्हारा पत्र आगामी डाकमें आये तो आये। डाकको बराबर सात दिन लग जाते हैं।
बापूके आशीर्वाद
- [गुजरातीसे]
- बापुना पत्रो-१ : आश्रमनी बहेनोने