१३ मार्च, १९२९
महात्मा गांधीने इस बातपर प्रसन्नता प्रकट की कि श्रोताओंमें अधिकांश बर्मी लोग मौजद हैं। इसके पश्चात, उन्होंने शराबखोरीके बारेमें कहा:
कल यह सुनकर मुझे बड़ा ही क्लेश पहुँचा कि शराबखोरी बढ़ती जा रही है और यह जानकर अत्यधिक पीड़ा हुई कि शराबसे मिलनेवाली चुंगी भू-राजस्व की एक-तिहाईके बराबर हो जाती है। संसारका कोई भी देश हो, ऐसी स्थिति उसके लिए सचमुच बड़ी भयंकर होगी, लेकिन बर्मा-जैसे देशके लिए तो यह आत्म-घातसे किसी भी कदर कम नहीं है, क्योंकि यहाँकी जलवायु शराबखोरीके सर्वथा प्रतिकूल पड़ती है। मैं जानता हूँ कि यह लत भारतमें कितनी बर्बादी ढा रही है। शहरोमें रहनेवाले लोगोंपर इससे एक गम्भीर दायित्व आ जाता है। मैं चाहता हूँ कि बर्मी जनताके नेतागण इस समस्यापर गम्भीरतासे विचार करें और इसे जड़से उखाड़ फेंकनेका भरपूर प्रयास करें। ठंडी जलवायुवाले देशोंमें जो भी हो, लेकिन हमारे देश-जैसी जलवायु में शराबकी कतई कोई जरूरत नहीं। शराबखोरीके शिकार बननेवाले देशके लिए बर्बादीके अलावा कोई रास्ता नहीं रह जाता। इतिहास गवाह है कि इस लतने बड़े-बड़े साम्राज्योंको तबाह कर दिया है। हमारे देशमें श्रीकृष्णको जिस महान जतिने जन्म दिया था। शराबखोरीकी लतने उसे तभी नेस्तनाबूद कर दिया। रोम साम्राज्यके पतनमें अन्य कारणोंके साथ इस एक कारणका भी बड़ा हाथ था। इसलिए यदि आप सुसंस्कृत और सुन्दर जीवन बिताना चाहते हैं तो आपको समय रहते इस बुराईसे दूर हो जाना चाहिए।[१]
महात्मा गांधीने बर्मी महिलाओंको सम्बोधित करते हुए उनका ध्यान दो बातोंकी ओर आकर्षित किया: बढ़िया विदेशी वस्त्रोंमें उनकी रुचि और धूम्रपान की आदत। उन्होंने बतलाया कि बर्मामें कदम रखते हो वे वहाँके स्त्री-पुरुषोंसे स्नेह करने लगे थे, और यदि बर्मी महिलाओंमें विदेशी वस्त्रोंका इतना ज्यादा शौक न होता। तो उनका स्नेह और भी बढ़ गया होता। उन्होंने आशा व्यक्त की कि बर्मी महिलाएँ इस मामले में अगुआई करेंगी।
आप लोगोंको इस समय जितनी स्वतन्त्रता मिली हुई है, उतनी संसारके किसी भी दूसरे देशकी महिलाओंको प्राप्त नहीं है। आपकी उद्यमशीलता और आपके कौशल का सभी लोहा मानते हैं। आपके अन्दर संगठनकी बड़ी क्षमता है और यदि आप
- ↑ यह अनुच्छेद महादेव देसाई द्वारा प्रस्तुत गांधीजीकी वर्मा-यात्राके विवरणसे लिया गया है।