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मैं वास्तवमें खादीका इस्तेमाल सदाके लिए स्थायी बना देना चाहता हूँ, इस लिए कि किसानोंको नेस्तनाबूद होनेसे बचानेका बस एक यही उपाय है। मेरा दावा है कि खादी में राजनीतिक स्वतन्त्रता प्राप्त करानेकी सामर्थ्य है और इतना ही नहीं उसमें किसानोंको शोषकोंसे बचानेकी क्षमता भी ह। स्पष्ट है कि पत्र लेखकको अपने ही देशके पिछले इतिहासकी और खादीके वर्तमान विकासकी कोई जानकारी नहीं है। दुनियामें जब कहीं भी लोगोंको सूतकी उपयोगिताकी जानकारी नहीं थी, उस कालमें ही भारतने सुरुचिका एक ऊँचा मानदण्ड स्थापित करके पश्चिमके धनी देशोंको विविध रंगोंके महीनसे-महीन उत्तम वस्त्र भेजने शुरू कर दिये थे और खादीका वर्तमान विकास सिद्ध करता है कि वह धीरे-धीरे ही सही, पर निश्चित कदमोंसे सुरुचिपूर्ण लोगोंके मनमें दिन दिन अधिक प्रवेश करती जा रही है। आखिर सच्ची कला तो स्त्री पुरुषोंके हाथोंके सजीव स्पर्शसे ही अभिव्यक्ति पा सकती है; बड़े पैमानेपर उत्पादनके लिए बनाई गई शक्ति चालित निर्जीव मशीनोंसे तो उसे व्यक्त नहीं किया जा सकता। पत्र-लेखक आचार्य कृपलानी और उनके शिष्योंसे सम्पर्क स्थापित करें, जो खादीको सुन्दर बनानेके लिए बड़े पैमानेपर प्रयोग कर रहे हैं। इस पत्र लेखकने खादीके तथाकथित महँगेपनका प्रश्न भी उठाया है। मैंने उसके बारेमें इसलिए नहीं लिखा कि 'यंग इंडिया' के इसी अंकमें अन्यत्र उसकी चर्चा की जा चुकी है। [अंग्रेजीसे] यंग इंडिया, १४-३-१९२९
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भाषण : रामकृष्ण मिशन, रंगूनमें'
बहनो और भाइयो, ।
१४ मार्च, १९२९
रामकृष्ण मिशनने कृपापूर्वक मुझे जो अभिनन्दनपत्र दिया है उसके लिए मैं उसके सदस्योंको धन्यवाद देता हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि आप लोग मौलाना मुहम्मद अलीको यहाँ मेरे साथ देखकर बहुत खुश हैं। लोग मुझसे अक्सर पूछते हैं कि आपके अली बन्धु कहाँ हैं? तब मैं उन्हें वहीं जवाब देता हूँ जो मैं अनुभव करता हूँ। आज मैं इस प्रकारको पूछ-ताछसे बच गया हूँ। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि खुदाकी इच्छा होकर रहेगी और मैं इन्हें हमेशा अपने साथ पाऊँगा। इससे ज्यादा मैं आपको और कुछ नहीं बताना चाहता।
अब मैं आपको रामकृष्ण परमहंस और उनके मिशनके बारेमें कुछ बताना चाहता हूँ। वह हमारे लिए एक बहुत बड़ा काम छोड़ गये हैं। मुझे उनके मिशनमें आस्था है और मैं आपसे उनका अनुकरण करने को कहूँगा। जहाँ कहीं मैं जाता हूँ, रामकृष्णके अनुयायी मुझे सदा निमंत्रित करते हैं और मैं जानता हूँ कि मेरे कार्यको उनकी १. इस समारोहका आयोजन रामकृष्ण परमहंसके जन्म-दिवस समारोहके सिलसिले में किया गया था।