इसके बाद बर्मासे अब एक ही डाक अर्थात मंगलवारको जायेगी। गुरुवारको तो हम लोग यहाँसे रवाना हो जायेंगे।
बापूके आशीर्वाद
गुजराती (जी० एन० ५३९३)की फोटो-नकलसे।
१३३. पत्र : गंगाबहन वैद्यको
१५ मार्च, १९२९
तुम्हारा शरीर अबतक तो बिलकुल स्वस्थ हो गया होगा। इस वर्ष तुमसे और जो लोग आगे आयें, उनसे बहुत काम लेना है। देखता हूँ कि आश्रम स्वयं निश्चित हो जाये और मैं भी आश्रमके विषयमें निर्भय हो जाऊँ, इसकी बहुत आवश्यकता है। दिनके समयका आराम कदापि नहीं छोड़ना। क्रोधका बिलकुल त्याग करो और हरएक शब्द सोच-विचारकर, तोलकर मुँहसे निकालो। सबकी आलोचना सहन करो। प्रार्थनामें नियमपूर्वक जाना और कताईके लिए समय बचाना।
बापूके आशीर्वाद
बापुना पत्रो-६ : गं० स्व० गंगाबहेनने
१३४. पत्र: ब्रजकृष्ण चाँदीवालाको
१५ मार्च, १९२९
तुमारा खत मीला है। तुमारे यहाँ ठहरना मुझको प्रिय लगता है। परंतु तुमारे घरमें तुम एक महमान हो। जिस घरके वडील वर्ग मेरे कार्यमें और मेरे विचारमें श्रद्धा न रखे वहाँ मेरा ठहरना अनुचित है। तुमारे भी आग्रह करना अयोग्य है। दूसरा कारण यह है की घरकी आर्थिक स्थितिको देखते हुए भी मुझे तुमारे यहाँ नहि रहना चाहीये। ऐसे तो मैंने तुमारे पाससे बहोत सेवा ली है, तुमारा धनका भी उपयोग कीया है। अब ज्यादा देनेका लोभ तुमारे छोड़ना चाहीये।
तुमारा शरीर अच्छा होगा।
इतना कहनेके बाद मैं तो तुम जैसे कहोगे वैसा ही करूंगा। देवदाससे मश्वरा कर लो।
बापुके आशीर्वाद
जी० एन० २३६२ की फोटो-नकलसे।