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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/२१२

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

नहीं मानूंगा। क्या मगनलालसे कभी भूल नहीं होती थी? लक्ष्मीदाससे भी भूलें हुई हैं। मनुष्य तो मूलका पुतला माना जाता है। मनुष्यकी भावना शुद्ध हो, वह पूर्णतया जागरूक हो, पूर्ण उद्यम करे और कुशलता प्राप्त करनेका पूर्ण प्रयत्न करे, इसपर भी यदि भूलें हों तो वे सब क्षन्तव्य और सह्य हैं।

हम जितनी वस्तुएँ बनाते हैं उनकी सूचना अवश्य छपनी चाहिए। ऐसा करना हमारा कर्त्तव्य है।

सुलोचनाबहनकी मुझपर बहुत अच्छी छाप पड़ी है। उन्हें अपने यहाँ बनाये रखनेकी शक्ति हममें होनी चाहिए। वसुमती और सुलोचनाबहन साथ रहेंगी, यह तो अच्छा है। उन्हें कुछ दे सको सो देना और वे जो सेवा कर सकें, वह कराना। जहाँ तक उनकी इच्छाके अनुकूल काम दिया जा सके, देना।

छोटा पिंजाई वर्ग शुरू करनेका विचार अच्छा है। उसके बारेमें 'नवजीवन' में लिखना चाहो तो लिखना। अभी दूसरे प्रान्तोंसे सीखनेवालोंको बुलाना नहीं है। किन्तु यदि कोई योग्य मनुष्य आना चाहे तो उसे ना न करना। गुजराती 'नवजीवन' में इस विषयमें जो लिखो उसका विवरण 'हिन्दी नवजीवन' में न हो इसका ध्यान रखना। इस सम्बन्धमें मैं यहाँसे नहीं लिख रहा हूँ। वहींपर एक टिप्पणी लिखकर अपने हस्ताक्षरसे छाप देना।

रोमाँ रोलाँका पत्र मीराबहनको भेजकर ठीक ही किया है।

मगनलाल-स्मारक आश्रम में ही रहे इस विषयमें शंकरलालसे बात करना। मुझे तो बात पसन्द आई है। शायद कुछ लोग यह मानेंगे कि उसमें हमारे नियम बाधक होते हैं। क्या डा० मेहताका बंगला उसके लिए ठीक है? मैं जब आऊँगा इस विषय में मुझसे चर्चा करना।

गोसेवा संघका संविधान तो कबका भेज चुका हूँ।

बाल-मन्दिरको चलानेके बारेमें मेरे विचार तुम जानते हो। अब उसमें फेरफार या वृद्धि करनेके बारेमें मेरा कुछ बताना जरूरी नहीं है। मैं वहाँ उपस्थित होता तो दूसरी बात थी। किन्तु मेरी गैरहाजिरीमें सिद्धान्तके अनुकूल सभी फेरफार किये जा सकते हैं।

गंगाबहनका काम अलौकिक है। उनकी भावना और उद्यम तो ईर्ष्या करने लायक हैं। उन्होंने तो आश्रमके लिए संन्यास ही ले लिया है। उनका स्वभाव सहन करना हमें सीख लेना चाहिए। जहाँ आवश्यक हो, मामाको चेतावनी देते रहना। फिर भी मूल करें तो वह जोखिम उन्हें उठानी होगी। किसी बातकी शंका भी हो तो उनके सामने स्पष्ट रीतिसे रखना।

तोतारामजीकी आँखोंके बारेमें चिन्ता होती है। शायद उनकी खुराकमें फेरफार-की जरूरत है। उन्हें सिर्फ दूध, मुनक्का तथा नींबू लेना चाहिए या उपवास करें और खूब पानी पियें। आँखका पेटके साथ निकट सम्बन्ध है; कौनसे अवयवका नहीं है?