कलकत्ता
२६ मार्च, १९२९
सार्वजनिक जीवनमें मेरा एक महत्त्वपूर्ण दर्जा है, और उस नाते अदालत और जनताके सामने मुझे अपने आचरणके सम्बन्धमें, जो इस अभियोगका मुख्य विषय है, सफाई देनी है। मैं राष्ट्रीय कांग्रेसकी कार्य समिति द्वारा गठित विदेशी-वस्त्र-बहिष्कार समितिका अध्यक्ष हूँ। कार्य-समिति द्वारा स्वीकृत बहिष्कार योजनामें, जहाँ-कहीं सम्भव हो, विदेशी वस्त्रको जलानेकी बात भी शामिल है। इसीलिए स्वभावतः मैंने श्रद्धानन्द पार्कमें हुई सभामें विदेशी वस्त्र इकट्ठा करने और उसे जलानेकी सलाह दी थी। पुलिस कमिश्नरके यहाँसे जो नोटिस मेरे और मेरे साथियोंके नाम आया था, उससे हमें परेशानी हुई। हम एकदम समझ गये कि इसका उद्देश्य सम्पत्तिको आगके खतरेसे बचाना नहीं था बल्कि इसका मकसद तो प्रदर्शनको रोकना था। किसी निजी स्थानपर होली जलानेकी हमें छूट थी। लेकिन दोनों वकील इस निष्कर्षपर पहुँचे कि पुलिस अधिनियमकी धारा ६६ की जो व्यवस्था की गई है वह यदि बिल्कुल गलत नहीं तो शंकास्पद तो जरूर है। इसलिए हमने पूर्व घोषणाके मुताबिक पार्कमें पूरी तरह प्रदर्शन करनेका निर्णय किया ताकि अदालतके सामने पुलिसकी व्याख्याकी परख हो सके।
यह बहिष्कार सविनय अवज्ञाका भाग नहीं है केवल अवज्ञा करने और गिरफ्तार होनेके ख्यालसे पुलिसकी नोटिसकी अवहेलना करनेका कोई इरादा नहीं था।
मैंने वस्त्रोंमें आग लगाने से पहले अंग्रेजीमें बोलकर यह बात स्पष्ट कर दी थी ताकि वहाँ उपस्थित पुलिसवाले उसे सुन और समझ लें। मेरा विश्वास है कि जब मैं बोल रहा था तो पुलिसके डिप्टी कमिश्नर वहाँ मौजूद थे। इसीलिए जब मैंने वस्त्र जलाने की क्रियाके करीब-करीब समाप्त होनेके बाद, पुलिसको आगके चारों तरफ खड़े लोगोंपर टूट पड़ते, अपनी बड़ी-बड़ी लाठियोंसे उन्हें पीटते और उन्हें वहाँसे भगाते तथा अंगारोंको बुझाते देखा तो मुझे आश्चर्य हुआ और बहुत पीड़ हुई आगे के दर्दनाक दृश्यका वर्णन मैं यहाँ नहीं करूँगा लेकिन यदि अदालत चाहेगी तो मैं इससे सम्बन्धित प्रश्नोंके उत्तर शौकसे दूंगा।
मैं साहसपूर्वक यह कह सकता हूँ कि कानूनको अपने हाथमें लेकर, खासकर मरे उस स्पष्ट वक्तव्यके बावजूद जिसका कि मैं ऊपर उल्लेख कर चुका हूँ, पुलिसने गलती की है और उन्हें मेरे स्थानपर और मुझे उनके स्थानपर होना चाहिए। उन्हें अभियुक्त होना चाहिए और मेरे साथी और मुझे फरियादी। इसके पहले भी कई अवसरोंपर मुझे संसारके दूसरे देशोंमें कानूनोंकी पुलिस द्वारा की गई व्याख्यासे १.
- ↑ यह बयान कलकत्ताके चीफ प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेटकी अदालत में दिया गया था।