१८३. टिप्पणियाँ
अन्धाधुन्ध गिरफ्तारियाँ
मजदूर नेताओं या तथाकथित साम्यवादियोंकी गिरफ्तारीसे सरकारकी भयभीत अकुलाहटका पता चलता है और वह ऐसे काम कर रही है जिनके कि हम आदी हो चुके हैं और जो दमनचक्र आरम्भ होनेकी पूर्व-सूचना देते हैं। इससे यह भी स्पष्ट है कि देशकी सरकार तमाम कानूनोंकी उपेक्षा करनेकी अपनी ताकतका समय-समयपर प्रदर्शन करनेकी बातमें विश्वास रखती है, और भयभीत भारतको परदेकी आड़में छुपे रहनेवाले अपने खूनी पंजे कभी-कभी दिखाते रहना जरूरी समझती है। बेशक, गिरफ्तार लोगोंके ऊपर बाकायदा अदालतमें मुकदमा चलानेका स्वांग भी रचा जायेगा। अगर गिरफ्तार किये गये नेता बुद्धिमान हैं तो वे इस जालमें नहीं फँसेंगे और वकीलो द्वारा अपना बचाव उपस्थित करके इस स्वांगमें मदद नहीं करेंगे। उलटे उन्हें साहस-पूर्वक कैदको सजाका जोखिम उठाना चाहिए। अगर कानूनके नामपर चलनेवाली इस अराजकताकी स्थितिका हमेशाके लिए अन्त करना है तो शीघ्र ही हजारों लोगोंको न केवल कैद पानेके खतरेका सामना करना पड़ेगा बल्कि उसका स्वागत करके उसे स्वीकार करना पड़ेगा।
मेरे विचारमें, इन गिरफ्तारियोंका हेतु साम्यवादको मिटाना नहीं है, इसका हेतु तो जनतामें आतंक पैदा करना है। अगर साम्यवादके मानी हिंसापूर्ण साधनों द्वारा सत्ता और सम्पत्तिको अपने अधीन करना है, तो कहना होगा कि देशका जनमत साम्यवादरूपी इस राक्षसका सफलतापूर्वक मुकाबला कर ही रहा था। कांग्रेसका ध्येय, न केवल कांग्रेसका ही बल्कि तमाम राजनैतिक दलोंका ध्येय, अहिंसात्मक साधनों द्वारा राजनैतिक स्वतन्त्रता प्राप्त करना है। लेकिन सरकारने अपनी करतूतोंसे हिंसा में विश्वास रखनेवालोंको वह उत्तेजन दिया है जो उनमें पहले कभी नहीं था। सरकार बहुत चतुर है और उससे यह छुपा नहीं था कि यह सब अवश्य होगा। अतः इन गिरफ्तारियों के हेतुका पता पानेके लिए दूसरी दिशामें कोशिश करनी चाहिए। एक बात तो निश्चित है। जनतामें से प्लेगकी भाँति ही दमन चक्रका भी डर दूर हो गया है। स्वराज्य आन्दोलनने भी जनताके दिलमें इतनी गहरी जड़ जमा ली है कि उसे हिलाना या नष्ट करना कठिन है। इन गिरफ्तारियोंसे उसका और अधिक जोर पकड़ना एक निश्चित बात है। स्वातन्त्र्य आन्दोलनकी जड़पर कुठाराघात करनेवाले सरकारके प्रत्येक कार्यका अब यही परिणाम होगा। श्री साम्बमूर्ति और श्री खाडिलकरकी गिरफ्तारी और उनपर चलाया गया मुकदमा, पण्डित सुन्दरलालकी पुस्तककी जब्ती, श्रद्धानन्द पार्कमें पुलिसका व्यवहार, और ऐसी ही दूसरी घटनाएँ जिनकी ओर मेरा ध्यान नहीं जा पाया है, संयुक्त रूपसे एक ही बातकी घोषणा करती हैं।