१८८. भाषण: बम्बईको सार्वजनिक सभामें[१]
५ अप्रैल, १९२९
हिन्दीमें भाषण आरम्भ करते हुए[२] उन्होंने कहा कि यह सच है कि मैं कई सालों बाद बम्बईमें किसी सार्वजनिक सभामें बोल रहा हूँ। इस बार भी मुझे पता नहीं था कि मुझसे किसी सभामें बोलने के लिए कहा जायेगा। मैं तो बम्बई प्रान्तीय कांग्रेस कमेटी तथा बम्बई यूथ लीगके तारोंके उत्तरमें आया था। उन्होंने कहा कि बम्बई इतिहासमें एक समय ऐसा भी था जब आज जहाँ आप इकट्ठा हुए हैं, के इतनी थोड़ी-सी जगहमें एक सार्वजनिक सभामें भाषण करना मेरे लिए सम्भव नहीं होता था। यहाँतक कि कभी-कभी तो चौपाटीका मैदान भी छोटा पड़ जाता था। उस समय जनतामें बहुत उत्साह हुआ करता था। चालू वर्षके लिए देशने जो राष्ट्रीय कार्यक्रम अपनाया है उसको देखते हुए तो मैं यही कहूँगा कि देशकी सेवाके लिए १९२१-२२ की अपेक्षा आज उत्साह तथा शक्तिसे काम करनेकी कहीं अधिक जरूरत है।
राष्ट्रीय सप्ताह मनानेके बारेमें बोलते हुए महात्मा गांधीने यह ध्यान दिलाया कि जलियाँवाला बागका हत्याकाण्ड १३ अप्रैलको हुआ था। उस घटनाके बादसे पिछले सभी सालोंमें ६ से १३ अप्रैलतक राष्ट्रीय सप्ताह मनाया जाता रहा है।कांग्रेसके माध्यमसे राष्ट्रने जो संकल्प किया है यदि वह कोरी शान नहीं है तो कन्याकुमारीसे कश्मीरतक तथा डिब्रूगढ़से कराचीतक लोगों को फिरसे लगनपूर्वक काम करना पड़ेगा।
स्वर्गीय श्री उमर सोवानीकी स्मृतिमें स्थापित पुस्तकालय, जिसका कि उद्घाटन होना था, का उल्लेख करते हुए महात्माजीने कहा कि उमर सोबानीने बम्बईको जो सेवा की वह वास्तव में अद्वितीय थी। इसके बाद गांधीजीने बम्बई प्रान्तीय कांग्रेस कमेटीके नये भवनकी चर्चा की जिसका कि उद्घाटन वह शीघ्र करने ही वाले थे। उन्होंने विनोद-भावसे कहा कि यदि कांग्रेस नया कार्यालय खोल सकती है तो वह देशके लिए स्वतन्त्रताका नया युग भी आरम्भ कर सकती है। उन्होंने आगे कहा कि इसके लिए जिस चीजकी जरूरत है वह है आत्म-विश्वास। भाषण जारी रखते हुए उन्होंने अपने श्रोताओं को इस बातकी याद दिलाई कि कांग्रेसने देशवासियोंसे उस जबरदस्त राष्ट्रीय संग्राम में जूझने के लिए तैयार रहनेको कहा है जो १९२९ के अन्तमें शुरू होनेवाला है। उन्होंने कहा, मैं आशा करता हूँ कि इस वर्षके दौरान देशवासी कांग्रेस द्वारा निर्धारित कार्यक्रमको पूरा करेंगे। कांग्रेस कार्यक्रमका सर्वप्रथम और सबसे महत्त्वपूर्ण १. २. ।