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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय
मिलनेवाले मेरा इन्तजार कर रहे हैं।
मैं श्रीमती नायडूके घर ठहरा हूँ।
सप्रेम,
बापू
[पुनश्च:]
बा, प्रभावती, इमाम साहब, प्यारेलाल और सुब्बैया मेरे साथ हैं। महादेवकी वल्लभभाईको जरूरत थी।
अंग्रेजी (जी० एन० ९४१४)से; तथा सी० डब्ल्यू० ५३५८ से भी।
सौजन्य : मीराबहन
सौजन्य : मीराबहन
१९४. पत्र: छगनलाल जोशीको
७ अप्रैल, १९२९
चि० छगनलाल,
तुम्हें बम्बईसे पत्र लिखा था।[१] वह पहुँच गया होगा। यह पत्र हैदराबादसे लिख रहा हूँ। किशोरलालने ह...[२]शा...[३]मिलनेकी सलाह दी है। इसलिए वह उसे मिलेगा। उसने मेरी अनुमति माँगी थी, सो मैंने दे दो है। तुम इसे लेकर परेशान मत होना। शान्त रहना। हमारे हाथों अन्याय न हो, इसके विषय में हमें सावधान रहना है। हमारे साथ धोखा हो तो कोई बात नहीं; पर किसीके साथ अन्याय हो तो वह ठीक नहीं होगा। हमारे सावधान रहते हुए भी कोई पाप करता रहे तो उसके बारेमें हम निश्चिन्त रहें, क्योंकि उसमें हमारा कोई हाथ नहीं है। अधिक विस्तारसे लिखनेका समय नहीं है। इस समय मुझे भागना होगा। वामन नायक[४] मेरे सामने बैठा है।
बापूके आशीर्वाद
गुजराती (जी० एन० ५३९७)की फोटो-नकलसे।