६ ग्रेन कुनैन, हर खुराकमें ३ ग्रेन, सोडा और नींबूके साथ लेनेकी सलाह देता हूँ। सस्नेह।
बापू
१९९. तार: माधवजी वी० ठक्करको
बैजवाड़ा
९ अप्रैल, १९२९
इम्पॉर्टेन्स
कलकत्ता
खुशी हुई कि तुमने व्रत तोड़ दिया। सन्तरे और अंगूरका रस जारी रखो। तीन दिन उसमें पानी मिलाकर लो। उबला हुआ पानी ज्यादासे-ज्यादा पियो, पानी चाहे ठंडा हो या गरम, उसे चाहे सादा लो या नींबूका रस और नमक डालकर या फिर शहदके साथ। जमीनपर सोनेके बजाय ऊँचे पलंगका इस्तेमाल करो। वजन रोज लिया करो।
गांधी
२००. पत्र: मीराबहनको
स्थायी पता:
सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
९ अप्रैल, १९२९
मैंने तुम्हें कल पत्र भेजा है। आज मैंने लगभग पूरे समाचार तारसे भेजे हैं। मुझे खुशी है कि इस समय तुम संकटसे मुक्त हो। परन्तु रोगके ये दौरे तुम्हारे लिए ऐसी चेतावनी हैं, जिनकी तुम्हें उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। हाँ, मुझे रोलाँके पत्रका अनुवाद जरूर मिल गया, मेरे खयालसे अहमदाबादमें मिला, कलकत्तेमें तो हरगिज नहीं। मुझे उम्मीद है कि मैं तुम्हारे पास जवाब भेजूंगा और तुम उसे अनुवादके साथ भेज देना।