सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/२६३

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।

२०३. भाषण: नन्दीगाँवमें

९ अप्रैल, १९२९

महात्माजीने कहा कि १९२० से यहाँ जो शान्ति बनी हुई है उसकी मुझे बहुत खुशी है। मेरे विचारमें तो स्वराज्यका अर्थ मनकी शान्ति तथा सब लोगोंके साथ शान्तिपूर्वक रहना है। बड़े शहरोंके लोगोंको सुधारना तो बहुत मुश्किल होता है लेकिन गाँवोंमें, जो मुझे गन्दे और उजड़े हुए दिखाई देते हैं, इसके बहुतसे अवसर हैं। जो लोग इन गाँववासियोंकी स्वच्छता तथा स्वास्थ्य के लिए उत्तरदायी हैं क्या वे इस कार्यकी ओर ध्यान नहीं दे सकते? मुझे आशा है--और मेरा विश्वास कि मेरी यह आशा निष्फल नहीं होगी कि सैकड़ों नवयुवक जो आजके दिन मेरे सामने इकट्ठा हुए हैं, इस कार्यमें सहयोग देनेके लिए आगे आयेंगे।

आपके यहाँ रुई उपलब्ध है और अपने अभिनन्दनपत्रोंमें आपने कहा है कि सब लोगोंको खद्दर ही पहनना चाहिए। यदि आप ऐसा ही करें भी तो इससे मुझे वास्तवमें बहुत खुशी होगी। यहाँ मुझे कुछ बहनें दिखाई दे रही हैं जिनमें से कुछ खादी पहने हुई हैं। सिर्फ कुछ ही क्यों खादी पहने हुई हैं? स्त्रियोंको भी पुरुषोंकी भाँति ही स्वराज्य तथा आत्म-शुद्धिकी प्राप्तिमें हिस्सा लेना चाहिए। मैं स्वराज्यकी बात नहीं बल्कि रामराज्यकी बात कह रहा हूँ। यदि सीता नहीं होगी तो रामराज्य भी नहीं होगा। यदि आप रामराज्य चाहती हैं तो आप सब सीताकी तरह बनिए। इतिहासके अनुसार सीता केवल खद्दर पहनती थीं और देशी वस्तुओंका ही प्रयोग करती थीं। इसी पवित्रताके कारण रावण सीताको छू तक नहीं सका था। सीताने अग्निप्रवेश किया लेकिन वह सुरक्षित रहीं। हिन्दू नारियाँ भी यदि प्रयत्न करें तो इतनी ही पवित्र बन सकती हैं।

आजकल लोगों में शराब पीनेकी बुरी आदत है। शराबी यह भेद नहीं कर पाता कि कौन उसकी माँ और कौन उसकी पत्नी है। यदि आप पवित्रता चाहते हैं तो शराब छोड़ दीजिए। आप तो बेशक यह जानते ही हैं कि स्वराज्यमें अस्पृश्यता नहीं होनी चाहिए।

आपने मुझे १,१७० रु० भेंट किये हैं। मैं जानता हूँ कि आप इससे भी अधिक दे सकते हैं। आन्ध्र देशमें पुरुष भी स्त्रियोंके समान आभूषण पहनते हैं। स्त्रियोंको बाहर निकलकर मुझसे मिलनेमें डर लगता है, क्योंकि जब वे आती हैं तो मैं उनके आभूषणोंको ही देखता हूँ। मैं उनसे आभूषण ले चुका हूँ। जब करोड़ों लोग भूखसे मर रहे हों तब दूसरे लोग आभूषण पहनें, यह ठीक नहीं है। उन्हें अपने सारे आभूषण दरिद्रनारायणको अर्पित कर देने चाहिए।

[अंग्रेजीसे]
हिन्दू, १०-४-१९२९