२३८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय बहुत-कुछ राजपालके हत्यारेकी तरह ही हैं । हमें इन भूलोंसे हतोत्साहित नहीं होना चाहिए । इस सप्ताह के दौरान हमारा कर्त्तव्य है कि हम अपनेको शुद्ध करें । मुझे दुख है कि श्री साम्बमूर्ति हमारे बीच नहीं हैं और इस समय मुझे आन्ध्र-रत्न डी० गोपालकृष्णय्याका भी स्मरण हो आया है, जो अब नहीं रहे । हमारे साथी हमारे साथ रहें या हमसे बिछुड़ जायें, लेकिन जो कुछ वे छोड़कर गये हैं उसको आगे जारी रखनेका भार तो अब भी हमपर ही है। कांग्रेसने खद्दर और मद्यपानके सम्बन्ध में जो आदेश दिये हैं उनका अवश्य पालन होना चाहिए। एक अभिनन्दनपत्र में इस बातका संकेत किया गया है कि हम धीरजके साथ प्रतीक्षा करते रहे और फिर भी सरकार कुछ नहीं कर सकी । सरकारसे प्रार्थना करने तथा उसे याचिकाएँ देने से हमारा कोई लाभ नहीं होनेका है । हमारा सम्बल तो आत्मनिर्भरता होना चाहिए, सरकारसे प्राप्त होनेवाली किसी प्रकारकी सहायता नहीं । उस कामके लिए हमें अहिंसा में प्रशिक्षित स्वयंसेवकोंकी जरूरत है । और फिर अस्पृश्यताकी समस्या है। नगरोंकी अपेक्षा गाँवों में बाधाएँ कहीं ज्यादा और कहीं अधिक प्रबल हैं । हमारे नवयुवकोंको चाहिए कि वे गाँवोंमें काम करके अस्पृश्यताको दूर करें। गाँवों में उनका शुद्ध जीवन गाँववासियोंके अनुकरणके लिए एक उदाहरण साबित होगा । खद्दरके लिए आपने मुझे २,५०० रुपये दिये हैं लेकिन ये तो बहुत थोड़े हैं। बैजवाड़ा तो इससे ज्यादा दे सकता है । जो अच्छे कार्य मुझे सौंपे गये हैं उनको पूरा करके मैं आजको सभाका समापन करूँगा । अब मैं बड़े हर्ष के साथ श्री कृष्णदेव रायके चित्रका अनावरण करता हूँ । इसके बाद मैं उच्च- स्तरीय जलाशयका उद्घाटन करने में खुशीका अनुभव कर रहा हूँ । मैं इस जलाशयको देख चुका हूँ और नगरपालिकाको धन्यवाद देता हूँ कि उसने मुझे जलाशयका उद्घाटन वहीं जाकर करनेसे बरी कर दिया। जो काम मैं पाँच या दस साल पहले किया करता था आज उसे करने में मुझे दिक्कत होती है । आज तो मैं उस कामका अंश मात्र ही कर सकता हूँ। मैं नगर परिषदका आभारी हूँ कि उसने मेरी असमर्थताके लिए तथा मेरी अनुपस्थिति के लिए मुझे क्षमा कर दिया है। हमारे धर्म-ग्रन्थोंके अनुसार लोगोंको पानीकी सुविधाएँ प्रदान करनेका कार्य एक पुण्य कार्य है । भारत जैसे गर्म देशमें तो जलाशयका होना जरूरी है। मुझे विश्वास है कि इससे शहरके गरीबों को पानी सबसे पहले प्राप्त होगा । आपने मेरी बातको धैर्यपूर्वक सुना इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूँ और यह देखकर मुझे खुशी हुई कि इन इलाकों में हिन्दी प्रचारका कार्य कमोवेश ठीक तरह चल रहा है। फिर भी इसके प्रसारकी काफी जरूरत है। इसकी ऐसी प्रगति हो जानी चाहिए कि आगेसे आपको हिन्दी भाषणका अनुवाद सुनाने की फिर जरूरत न पड़े। आशा है आप खादी कोष में अपनी सामर्थ्य-भर चंदा देंगे। मेरी आदत है कि जो अभिनन्दनपत्र तथा बहुमूल्य वस्तुएँ मुझे मिलती हैं मैं उन्हें नीलाम कर देता हूँ । नुज़वीड़में मुझे तीन अभिनन्दन- पत्र भेंट किये गये थे, जिन्हें नीलाम करनेपर मुझे ६० रुपये प्राप्त हुए । मैं आपको एक बार फिर धन्यवाद देता हूँ ।
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/२६८
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