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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/२७३

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२११. विधान सभामें मद्य-निषेध विधान सभाके सदस्य पूर्ण मद्य निषेधके प्रश्नपर ध्यान दे रहे हैं, यह एक स्वस्थ लक्षण है । मेरे दिमाग में जो दृष्टान्त है वह सर पुरुषोत्तमदास ठाकुरदासका है । चालू वर्षके वित्त विधेयकपर विचार करनेसे सम्बन्धित प्रस्तावपर दिये गये उनके भाषण में से मैं निम्नलिखित रोचक उद्धरण नीचे दे रहा हूँ । ' [ अंग्रेजीसे ] यंग इंडिया, ११-४-१९२९ २१२. तार : माधवजी वी० ठक्करको बैजवाड़ा [११ अप्रैल, १९२९] इम्पॉर्टन्स कलकत्ता वर्णनसे तो प्रकट होता है कि तुमने जरूरत से ज्यादा खाया है । अब केवल फलों के रस में पानी मिलाकर लो। दो दिनतक गूदा और दूध बिलकुल मत लो । यदि जरूरत पड़े तो चिकित्सककी सलाह ले लेना । अंग्रेजी (जी० एन० ६७७२ ) की फोटो - नकलसे । गांधी २१३. पत्र : छगनलाल जोशीको चि० छगनलाल, ११ अप्रैल, १९२९ तुम्हारा पत्र मिला है। अब क्या करना है, इस विचारसे मिलनेकी कोई जरूरत नहीं है। मिलो भी तो करनेके लिए बात तो एक ही है । हम नालायक हैं, यह बात कहकर उठ जाओगे तो अन्तमें निराशा ही बाकी रह जायेगी। किसी विशेष मुसीबतको सुलझाने के लिए जरूरी प्रस्तावपर विचार करनेके लिए मिलें तो ठीक माना जायेगा । ध्यानसे सोचें तो प्रस्ताव करनेकी भी जरूरत नहीं है। सिर झुका कर अपना कर्त्तव्य करता जाये, और विपत्तिपर उसका इलाज कर ले, यही योद्धाका काम है । हम सब अनीति से संघर्ष करनेवाले योद्धा हैं । जो कुछ करना था वह हम १. उद्धरण यहाँ नहीं दिया गया है। इसमें पुरुषोत्तमदास ठाकुरदासने भारतमें मद्य-निषेध लागू करनेके लिए वित्त सदस्यसे जोरदार अपील की थी। २. डाककी मुहरसे ।