हृदयके भाव छिपाये नहीं हैं । सभापतिकी हैसियतसे निर्भीकता पूर्वक कार्य-संचालन करके उन्होंने राष्ट्रकी प्रतिष्ठाको बढ़ाया है ।
अतएव यहाँ उनकी महान सफलताके कारणकी जाँच करना अनुचित न होगा । उनका अपना कोई स्वार्थ नहीं है । सादा जीवन बितानेके कारण उनकी आर्थिक जरूरतें बहुत थोड़ी हैं । यही कारण है कि उन्हें न तो ऊँचे पदका और न बड़ी तनख्वाहका कोई लोभ है । और इस विरक्तिके साथ ही उनके अन्दर ऐसी अद्भुत उद्यम-शक्ति है, जिसके कारण अपने उच्च पदका कार्य संचालन करनेके लिए जिन नियमों और कार्यप्रणालीका ज्ञान आवश्यक है, उसपर उनका अनन्य अधिकार हो गया है । विट्ठलभाई पटेलके लिए राजनीति फुरसतके वक्तका मनोरंजन नहीं है, वह तो उनके जीवनका प्रधान अंग बन गई है। अतएव उन्होंने राजनीतिके अध्ययनमें अपनी सारी बुद्धि और सारा समय खर्च कर दिया है, और इसके फलस्वरूप अपने क्षेत्र में उन्होंने अपने-आपको अजेय बना लिया है ।
- [ अंग्रेजीसे ]
- यंग इंडिया, १८-४-१९२९
२१८. तार : माधवजी वी० ठक्करको
वुय्यूर
[ १२ अप्रैल, १९२९][१]
- इम्पॉर्टेन्स
- कलकत्ता
- जबतक पाखाना अपने आप खुलकर न आने लगे तबतक रोज एनिमा लगाना जरूरी है ।
गांधी
- अंग्रेजी (जी० एन० ६७७४) की फोटो-नकलसे ।
- ↑ १. डाककी मुरहसे।