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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/२८१

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भाषण : आन्ध्र जातीय कलाशाला, मसूलीपट्टममें

समान ही जो आर्थिक कठिनाइयाँ झेल रहे हैं उनकी तरफसे मेरी आँखें बन्द नहीं हैं और इसका उपाय, जिसे बताने में मैं कभी थका नहीं हूँ, खद्दर है । इसलिए यहाँ उपस्थित पंचम भाइयोंसे मैं अपील करूँगा कि वे खद्दरको अपनायें ।

[ अंग्रेजीसे ]
हिन्दू, १५-४-१९२९

२२४. भाषण : आन्ध्र जातीय कलाशाला, मसूलीपट्टम में[]

१३ अप्रैल, १९२९

आप लोगोंसे दुबारा मिलनेका, खास तौर पर आपकी राष्ट्रीय संस्थाके उसी परिचित और पवित्र प्रांगण में मिलने का अवसर पाकर मुझे बहुत खुशी हुई है । लेकिन इस खुशी में पीड़ा और दुख भी मिले हुए हैं, क्योंकि आज मुझे यहाँ हनुमन्तरावके परिचित मुखड़ेका अभाव खटक रहा है, जो कि इस राष्ट्रीय कालेजके प्रवर्तक और प्राण थे। इसलिए इससे पहले कि मैं अपने भाषणके दूसरे अंशोंपर आऊँ, मैं अपने आपको दिलमें उमड़ रहे उन विचारोंके बोझसे हल्का कर लेना चाहता हूँ जिनका सम्बन्ध इस संस्थासे है । यह अब जगजानी बात है कि इस समय इस संस्थामें आपसी मनमुटाव है और इस बातका डर है कि हनुमन्तरावने जो श्रेष्ठ कार्य हमें वसीयत के रूपमें दिया था उसपर पानी न फिर जाये। उन सब लोगोंसे जो इस संस्थाके भविष्य के लिए उत्तरदायी हैं मैं सलाह तथा चेतावनीके तौरपर एक-दो शब्द कहूँगा । वह यह कि इस संस्थाके विशुद्ध राष्ट्रीय चरित्रको हर हालत में सुरक्षित रखें। भारतमें अपनी यात्राके दौरान मैं लोगोंको गर्वपूर्वक बताता रहा हूँ कि यह संस्था हमारे प्यारे देशके अन्दर उस विशाल मरुभूमिमें नखलिस्तानकी तरह है जिसने हमें इस समय चारों ओरसे घेर रखा है । परीक्षाकी घड़ीमें अपने विश्वासको डिगने मत दीजिए । केवल अनुकूल परिस्थितियों में ही पनपनेवाला विश्वास किसी

कामका नहीं होता । विश्वासका कोई मूल्य तभी है जब वह कड़ी से कड़ी परीक्षामें भी अडिग बना रहे । आपका विश्वास सारे संसारकी निन्दाके सामने भी यदि अडिग न रह सके तो फिर वह ठोस दिखकर भी भीतरसे खोखला ही है। इसलिए आपको अपनी संस्थाकी सफलताका मूल्यांकन इस संस्थामें प्रवेश लेनेवालोंकी संख्या के आधार पर कभी नहीं करना चाहिए, बल्कि इस राष्ट्रीय संस्थाकी भावी नीतिका निर्णायक तत्व गुण और केवल गुण ही होना चाहिए। यदि आपको अपने ऊपर भरोसा है तो आपकी इस संस्था में पढ़ने की इच्छा से यदि केवल एक बच्चा भी आयेगा तो उसको पढ़ाने में आपको सन्तोष मिलेगा । इसके विपरीत, यदि आपसे कोई इस शर्तपर एक

  1. १. यह भाषण “ आन्ध्र देशमें " शीर्षक लेखके एक अंशके रूपमें २५-४-१९२९ को प्रकाशित हुआ था।