लिए ही न ? लेकिन यह मुहर पानमें ज्ञानकी सिद्धि नहीं है । ज्ञानसिद्धि तो अभ्यासका फल है । सरकारी छापके नीचे तो सिर्फ नौकरी मिलनेकी इच्छा छुपी हुई है। नौ-जवानों की यह इच्छा स्वराज्यके मार्गमें रुकावट पैदा करती है । मैं युवकोंमें नये तेजके दर्शन कर रहा हूँ । मुझे उससे खुशी होती है । लेकिन वह तेज इतना प्रचण्ड नहीं है कि मेरी आँखोंको चौंधिया दे । यह तेज आज तो क्षणिक और बहुत अंशतक यान्त्रिक और बनावटी है । जब सच्चा तेज प्रकट होगा तब वह सूर्यकी किरणोंकी तरह सारे जगतको चौंधिया देगा । इस तेजोदयके बाद किसी भी विद्यार्थीको सरकारी शालाओं या कालेजोंकी गरज नहीं रहेगी। लेकिन आज तो सरकारके कागजी नोटोंकी भाँति उसके मदरसे और कालेज भी सिक्कोंकी तरह चल रहे हैं । यह मोह कौन दूर कर सकता है ?
- [ गुजरातीसे ]
- नवजीवन, १४-४-१९२९
२२८. पत्र : छगनलाल जोशीको
१४ अप्रैल, १९२९
तुम्हें कल पत्र नहीं लिखा। मैंने ह ...[१] को लिखा है कि जैसा उसकी अन्तरात्मा कहती है वैसा ही करे । जिस पुरुषका मन किसी स्त्रीके प्रति विकारमय हो, वह उसकी सेवा नहीं कर सकता; उसके दोष तो वह देख ही नहीं सकता । अधिकतर पति-पत्नी भी एक दूसरेके दोष नहीं देख सकते । इसके पीछे भी एक कारण है । यदि इतना मोह न होता तो स्त्री-पुरुषको गृहस्थी चलना असम्भव हो जाता। इसलिए वह शा ...[२] के दोष नहीं देख सकता, यह स्वाभाविक ही है । यह बात मैंने उसे बता दी है ।
तुम इसके और ऐसे ही मामलोंके बारेमें निश्चिन्त रहो । शा ...नियमोंका पालन करते हुए नम्रतासे रहना चाहे तो उसे रहने देना हमारा कर्त्तव्य है । छोटेलालका पत्र इसके साथ भेज रहा हूँ । उसके जानेके लिए न तुम दोषी हो और न वह ।
बालकोवाका[३] शरीरके प्रति मोह कम हो गया है, इसका क्या अर्थ है ? गिरिराज कितने दिनोंके लिए गया है ? कट्टो और विमलाको कुसुमके पास छोड़कर अच्छा किया है ।
बापूके आशीर्वाद
- गुजराती (जी० एन० ५४०३) की फोटो - नकलसे ।