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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/३०४

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

बम फेंकनेवाले और हत्यारे भी बने रहेंगे। अगर स्थानीय जनता उनसे हमदर्दी न रखे, उनके कामोंसे नफरत करे, तो अवश्य ही उनपर अंकुश रखा जा सकता है ।

छुरीकी अपेक्षा बमका सवाल बहुत आसानीसे तय हो सकता है । बमके लिए भारतमें कोई अनुकूल वातावरण नहीं है । अगर सरकार चाहे तो उसे आज ही बन्द कर सकती है; डर या आतंकसे नहीं बल्कि उदारतापूर्वक, समय रहते, राष्ट्रकी माँगको स्वीकार करके । लेकिन इसकी आशा करना तो दुराशामात्र है । सरकार केवल अपनी नीति बदल कर यह काम नहीं कर सकती, उसका हृदय बदलनेपर ही यह हो सकता है । और आज इस बातके कोई आसार नहीं दिखाई पड़ते कि सरकार यह सब करेगी।

हमारी सच्ची आशा तो राष्ट्रमें और कांग्रेसजनोंमें निहित है । मैंने अपनी यात्राओं में कहीं भी यह अनुभव नहीं किया कि राष्ट्रीय कार्यकर्त्ता हिंसापूर्ण उपायोंमें विश्वास रखते हैं। हाँ, अहिंसात्मक साधनोंमें सजीव श्रद्धाके मुझे दर्शन नहीं हुए हैं । लोगोंमें अहिंसाके प्रति श्रद्धाकी कमी मैंने देखी है। चारों ओर निराशाका वातावरण फैला हुआ दिखता है । मनुष्यको गिरानेवाले इस अनिश्चयके कारण ही कार्यकर्त्ताओं में कांग्रेस द्वारा निश्चित कार्यक्रमको उल्लासके साथ पूरा करनेका उत्साह नहीं दीख पड़ता । वे यह नहीं देखते कि अगर आजादी पानेके लिए राष्ट्रीय कार्योंमें अहिंसाको स्थान देना है तो कांग्रेस द्वारा निर्धारित कार्यक्रम ही उसका अनिवार्य और सहज परिणाम है । अगर हमें अपने कार्यक्रममें श्रद्धा हो, हम उसे लगनके साथ करते रहें, तो एक बड़ी हद तक हम बम फेंकनेवालोंपर अंकुश लगा सकते हैं ।

[ अंग्रेजीसे ]
यंग इंडिया, १८-४-१९२९
 

२४६. विदेशी-वस्त्र-बहिष्कार

कार्य समिति द्वारा नियुक्त की गई विदेशी वस्त्र-बहिष्कार-समितिके मन्त्री श्रीयुत जयरामदासने बड़ी तत्परताके साथ काम करना शुरू कर दिया है । समितिका प्रधान कार्यालय कांग्रेस हाउस, बम्बई है। वहाँसे मन्त्री बुलेटिन, पत्रिकाएँ आदि प्रकाशित करते हैं और म्युनिसिपल संस्थाओं आदिके नाम पत्र लिखते हैं। एक महत्त्वपूर्ण पत्रिका में भारत के खादी उत्पादन और खादी विक्रयके केन्द्रोंके नाम मय पतेके प्रकाशित किये गये हैं। पाठकों को यह सूची विदेशी वस्त्र-बहिष्कार समिति, कांग्रेस हाउस, बम्बई-४,के नाम एक आनेका टिकट भेजनेपर मिल सकती है । समितिका रजिस्ट्री किया हुआ तारका पता 'बायकाट' है । पाठकोंको यह जानकर हर्ष होगा कि देश भरमें ऐसे कुल ३२८ केन्द्र हैं, जिनमें से ६६ बंगालमें और ६४ तमिलनाडमें हैं । इनके अलावा ३९ आन्ध्रमें और ३३ बिहारमें हैं। वैसे तो यह सूची उत्साहवर्धक है, फिर भी देशकी विदेशी कपड़ोंकी दूकानोंके मुकाबले यह समुद्रमें एक बूंदके बराबर है। यह एक मानी हुई बात है कि अकेले बम्बई शहरमें विदेशी वस्त्रके ३२८ से अधिक बिक्रीके डिपो । देशकी जनताको चाहिए कि वह इस व्यापारको रोके, जिसकी वजहसे हर साल