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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/३०६

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

७ तारीखको हम लोग हैदराबादसे रवाना हुए। पहलेके कार्यक्रमके अनुसार हम और कहीं जाते लेकिन समय बचानेकी गरजसे देशभक्त हमें दूसरे रास्तेसे ले चले और दूसरे दिन सवेरे ३ बजे बोनकल स्टेशनपर ला उतारा । वहाँसे मोटरपर सवार होकर हम प्रान्तके भीतरी भागों में घुस पड़े। जो व्यवस्था की गई है उसके मुताबिक मुझे उन उन गाँवोंमें जाना है, जो थैलियाँ देंगे। गाँवोंकी यह यात्रा हमारी हार्दिक लगनका परिणाम नहीं, बल्कि मजबूरीका तकाजा है । बढ़ती हुई लोक-जागृति ने लोगों में अपने महत्त्वकी भावनाको जगा दिया है और यही वजह है कि इस बार उन्होंने अपनी शर्तें पेश की थीं। मानों वे कहते हैं : 'अगर गांधीजीके दर्शन कराओगे, तो हम चन्दा देंगे ।' ये भोले-भाले ग्रामीण शायद ही यह अनुभव करते हों कि मुझ जैसे एक कमजोर बूढ़े आदमीके लिए दुनिया-भरके शोरोगुल और लज्जित करने वाले भक्ति-भाव के बीच, एक जगह से दूसरी जगह भागते फिरना कितना कष्टप्रद है । लेकिन इस 'दर्शन' विधिके कारण मुझे आन्ध्र देशके ग्रामीण जीवनकी भीतरी हालतको नजदीकसे समझनेका अवसर मिलता है, भले ही वह कितना ही थोड़ा क्यों न हो । 'थोड़ा' इसलिए कहता हूँ कि भीड़वाली सभाओं में जाकर चन्दा स्वीकार करनेके सिवा मैं और कुछ कर भी नहीं पाता। अगर प्रबन्ध समितिने मुझे देहात में ठहरनेके लिए कुछ समय दिया होता तो अच्छा होता; क्योंकि उस हालत में मैं ग्राम-वासियोंसे बैठकर बातचीत कर सकता । मेरे लिए यह एक बड़े भारी सौभाग्यकी बात होती और साथ ही इससे मैं बहुत कुछ सीख भी पाता। लेकिन ऐसा होना नहीं था ।

बस आज यहींतक । अगले अंकोंमें कुछ अधिक मनोरंजक संस्मरण देनेकी आशा रखता हूँ । नीचे लिखी सूचीके[] साथ ही मैं इन जल्दीमें लिखी हुई पंक्तियोंको भी समाप्त करता हूँ । पाठकोंको इनसे पता चलेगा कि हम कितनी तेज रफ्तारसे आगे बढ़े हैं, और देशके अन्तर्प्रदेशमें कितने गहरे उतर गये हैं ।

[ अंग्रेजीसे ]
यंग इंडिया, १८-४-१९२९

२४८. पत्र : हरीशचन्द्र बेहरावालाको

१८ अप्रैल, १९२९

भाईश्री हरीचन्द,

तुम्हारा पत्र मिला । तुम्हारी सभी शंकाओंका निवारण कई बार 'नवजीवन' में किया जा चुका है। तुम्हारे पत्रमें आजको स्थिति सम्बन्धी तुम्हारे अज्ञानसे मुझे आश्चर्य और दुख हुआ है ।

मोहनदास गांधीके वन्देमातरम्

गुजराती (जी० एन० ५६७५ ) की फोटो - नकलसे ।
  1. १. यहाँ नहीं दी गई है। इसमें विभिन्न जिलोंमें प्राप्त चन्देको रकमका ब्योरा था ।