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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/३०७

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२४९. पत्र : छगनलाल जोशीको

१८ अप्रैल, १९२९

चि० छगनलाल,

आजकल इस तरह घूमना पड़ रहा है कि डाक मिलनेका कोई ठिकाना ही नहीं है । गाँवोंमें डाक मँगायें तो भी मुश्किल है । खास मोटरका प्रबन्ध करें तभी वह पहुँच सकती है । इसलिए कलकी और आजकी डाक कहाँ मिलेगी, यह मालूम नहीं है ।

रूपनारायण बाबूका पुराना पत्र मिला है। इसके साथ भेज रहा हूँ । बादमें क्या हुआ यह तुम्हें मालूम होगा; अथवा उनसे पूछ लेना और मुझसे कुछ कहना हो तो पत्र लिखना या उन्हें लिखनेको कहना ।

कल तुम्हें ब्योरेवार पत्र लिखा है ।

बापूके आशीर्वाद

[ पुनश्च : ]

इसके साथ वर्धाके खर्चके सम्बन्धमें जो टिप्पणी तैयार कराई थी वह भेज रहा हूँ । वापस मत भेजना ।

रंगूनसे काठियावाड़ परिषदके लिए कितना पैसा मिला है, इसके बारेमें पूरी बात लिखना । यह पैसा मणिलालने इकट्ठा किया था ।

बापू

गुजराती (जी० एन० ५५६०) की फोटो - नकलसे ।

२५०. पत्र : ब्रजकृष्ण चाँदीवालाको

१८ अप्रैल, १९२९

चि० ब्रिजकिसन,

तुमारा खत मीला है । जमनालालजीने भी मेरे से बात की थी। गांध [‌‌‍‌‌ी ] सेवा संघामां तुमारा मील जाना मुझको प्रिय है । मात्र इतना समझो कि उसमें प्रवेश करनेके बाद कभी नीकलनेका ख्याल न कीया जाय । कौटुंबिक जन तो इसमें भी नाराज होनेका संभव है । किसी न किसी तरह उनको नाराज तो होना हि है क्योंकि उनके और तुमारे आदर्शमें अंतर है तुमारा शरीर तो आच्छा होगा ।

बापुके आशीर्वाद

जी० एन० २३६३ की फोटो नकलसे ।