२५२. तार : मीराबहनको
तेनाली
२० अप्रैल, १९२९
खादी भण्डार
तुम्हारा तार मिला । कमजोरी बनी रहती हो तो तुम्हें अम्बालालके कारखाने में या जहाँ उचित हो तुरन्त चले जाना चाहिए। राजेन्द्रबाबूसे सलाह ले लो और वे न हों तो लक्ष्मीबाबूसे ले लो । अन्तिम निर्णयकी खबर बैजवाड़ा भेजो।
बापू
- अंग्रेजी (जी० एन० ९४२१ ) से; तथा सी० डब्ल्यू ० ५३६५ से भी ।
- सौजन्य : मीराबहन
२५३. पत्र : मीराबहनको
२० अप्रैल, १९२९
मुझे कल तुम्हारे दो पत्र मिले। और अब तुम्हारा तार मिला है । १४ मईको मैं इलाहाबाद नहीं जा रहा हूँ । २२ मईतक मैं आन्ध्रमें ही हूँ, इसके बाद मैं २३ तारीखको बम्बई पहुँचूँगा, वहाँसे २८ तारीखको आश्रमके लिए रवाना होऊँगा जहाँ मैं कमसे कम १० जूनतक रहूँगा । इसलिए २३ मईसे तुम जब चाहो तब आकर मेरे साथ शामिल हो सकती हो ।
यह दुर्भाग्यको बात है कि आश्रमकी जड़ जमनेसे पहले ही तुम्हें उसे तोड़ना पड़ रहा है । लेकिन तुम अपनी स्वाभाविक मर्यादाओंके विरुद्ध काम नहीं कर सकतीं । बोया हुआ बीज फलेगा अवश्य । तुम्हें अपने शरीरपर बहुत अत्याचार नहीं करना चाहिए। मिलनेपर हम इस विषयमें और चर्चा करेंगे। मेरे खयालमें अम्बालालकी फैक्टरी तुम्हारे लिए ठीक रहेगी। यदि ऐसा न हो तो तुम कहीं और चली जाना, यदि शान्तिनिकेतन जाना ठीक लगे तो वहाँ चली जाना । वरना तुम्हें माथेरान भेजा जा सकता है जहाँ मथुरादास रह रहे हैं। जब चाहो तब तार भेजो ।
जहाँतक दूधका सवाल है, तुम या तो नेसलका संघनित (कन्डेंस्ड) दूध लो, या अशोरीं दूध या फिर हॉरलिक्सका माल्टसे युक्त दूध लो । माल्ट मिले दूधमें