२५६. अगर सच है तो दुःखद है
पिछले फरवरी महीने में, कलकत्ते में, कवि श्री हंसराजने विदेशी वस्त्र के बहिष्कारके लिए गुजराती भाइयोंसे अनुरोध किया था। उनमेंसे एक गुजराती भाई लिखते हैं :[१]
मेरे विचारमें तो, जिन्होंने अपनी विदेशी टोपियोंको दे डाला था उन्हें भी मारवाड़ी भाईकी उदारताका लाभ नहीं लेना चाहिए था । कलकत्ते में ऐसे गुजराती हैं ही नहीं जो अपने पैसोंसे खादीकी टोपी न खरीद सकते हों। मगर यदि शिक्षकों ने और उनसे प्रेरणा पाकर विद्यार्थियोंने भी अपनी विदेशी टोपियोंको बगलमें दबाकर मारवाड़ी भाइयोंके पाससे खादीकी टोपियाँ मुफ्त ली हों तो अवश्य ही यह चोरी हुई। किसीको भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए। खासकर शिक्षक और विद्यार्थियोंके ऐसे काम तो अक्षम्य हैं। मैं आशा करता हूँ कि ऊपरकी बातमें कुछ-न-कुछ अति-शयोक्ति जरूर है । लेकिन अगर वास्तवमें ठीक हो तो जिन्होंने यह गुनाह किया है वे टोपियों की कीमत से ज्यादा रकम खादी-प्रचारके लिए दे कर, फिरसे ऐसा गुनाह न करनेकी प्रतिज्ञा करें और इस तरह प्रायश्चित्त कर लें ।
- [ गुजरातीसे ]
- नवजीवन, २१-४-१९२९
२५७. व्यापारी वर्ग और खादी
- चरखा संघके एक सदस्य लिखते हैं:[२]
इसमें शक नहीं कि आखिर एक दिन व्यापारियोंको खादी अपनानी पड़ेगी, लेकिन व्यापारियोंके अबतक खादीकी ओर न झुकनेके लिए खादीसेवकोंका कोई दोष नहीं है । व्यापारी लोग लालची और डरपोक होते हैं। यही वजह है कि खादी फौरन ही उन्हें अपनी ओर खींच नहीं सकती । आज तो खादीमें वही लोग दिलचस्पी लेते हैं, जिन्हें परोपकारकी धुन है, और देशकी गरीबीको देखकर जिनका दिल जला करता है। आमतौरपर व्यापारके मामलों में व्यापारी लोग परोपकार-भावनासे काम नहीं करते, इसी कारण व्यापारीकी परोपकार-भावना दान आदि करने में खर्च होती है, जिनसे उसके व्यापारकी थोड़ी भी क्षति नहीं होती। मगर जिस दिन व्यापारियोंमें भी शुद्ध देश-दाह पैदा होगी उस दिनसे वे भी खादीके व्यापारको अपनायेंगे ।
- ↑ १. यहाँ नहीं दिया गया है। बिड़ला खादी भण्डारने घोषणा की थी कि विदेशी टोपोका त्याग करने वालों को खादीकी टोपी मुफ्त दी जायेगी। लेखकके अनुसार कुछ लोगोंने विदेशी टोपी बगलमें छिपा कर खादीकी टोपिया ले लीं और एक मारवाड़ी भाईकी उदारताका गलत फायदा उठाया।
- ↑ २. यहाँ नहीं दिया गया है। इसमें मथुरादास पुरुषोत्तमके उस सुझावका उल्लेख था जिसमें व्यापारी वर्गको कमीशन देकर उसे खादी बेचनेका काम सौंप देनेका विचार किया गया था।