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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/३३

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पत्र : छगनलाल जोशीको
[पुनश्च :]

मैं इतवारसे मंगलवारतक दिल्लीमें हूँ। मेरा पता, द्वारा स्पीकर पटेल होगा; उसके बाद एक हफ्ते साबरमतीमें।

अंग्रेजी (एस॰ एन॰ १५३३९) की फोटो-नकलसे।

 

३. पत्र : छगनलाल जोशीको

१६ फरवरी, १९२९

चि॰ छगनलाल,

मीरपुर-खासमें तुम्हारा पत्र मिल गया था। रावजीभाईको नाकका ऑपरेशन कराना हो तो करा लें। मुझे तोतारामजीकी आँखकी खबर इस बार भी नहीं मिली।...[] भाईका तो पूरा किस्सा दुःखद माना जायेगा। अब शायद वे वापस नहीं आयेंगे।

मलकानी वहाँ मंगलवारको पहुँचेगा। तुम्हें पत्र लिखेगा। अन्तमें उसके बारेमें फैसला तो और ही किया है। उसे बिड़ला निधिमें से हर महीने १५० रुपये देने होंगे। वह काम सिन्धमें करेगा और अभी वहाँ खादीका क्रियात्मक शास्त्र सीखनेके लिए आ रहा है।

मैं बुधवारकी शामको वहाँ पहुँचूँगा। आन्ध्रकी यात्रा मुलतवी करके रंगून जानेका निश्चय किया है। ८ मार्चको रंगून पहुँच जायें इस हिंसाबसे वहाँसे रवाना होंगे। इस तरह दसेक दिन तो रहनेको मिल जायेंगे। रंगूनसे २१ मार्चतक रवाना होकर २८ मार्चके आसपास आश्रम पहुँच जाऊँगा। वहाँसे ३०, ३१ और १ अप्रैल काठियावाड़में बीतेंगे। फिर तुरन्त आन्ध्र प्रदेशकी ओर। वहाँ एक मास लगेगा। इसके बाद जहाँ भाग्य ले जायेगा वहीं।

बापूके आशीर्वाद

[पुनश्च :]

जयसुखलालको वेतन मन्दिरमें से देना और उसके लिए धन जिस किसी विभागसे लेना पड़े ले लेना। जयसुखलालको और हमें तो यही मानना चाहिए कि वह मन्दिरका ही सदस्य है।

गुजराती (जी॰ एन॰ ५३८९) की फोटो-नकलसे।

 
  1. नाम यहाँ नहीं दिया गया है।