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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 40.pdf/३४

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४. पत्र : शान्तिकुमार मोरारजीको

शनिवार [१६ फरवरी, १९२९][]

चि॰ शान्तिकुमार,

मुझे ८ मार्चको रंगून पहुँचना है और दूसरी मार्चसे पहले आश्रम नहीं छोड़ना है। फिर कौनसे रास्तेसे जाऊँ? कलकत्तेके रास्तेसे सबसे जल्दी पहुँच सकते हैं न? डेकपर जानेका विचार है। इस विषयमें तुम कुछ सुझाव दे सकते हो। यह मैं दिल्ली जाते हुए रास्तेमें लिख रहा हूँ। तारीख १७ से १९ तक दिल्लीमें रहूँगा। अध्यक्ष पटेलके यहाँ रहूँगा। माँजी अब तो बिल्कुल ठीक हो गई होंगी। बम्बईमें क्या हुआ? ठीक पता चला हो तो लिखना।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (सी॰ डब्ल्यू॰ ४७१२) की फोटो-नकलसे।
सौजन्य : शान्तिकुमार मोरारजी
 

५. पत्र : प्रभावतीको

शनिवार [१६ फरवरी, १९२९][]

चि॰ प्रभावती,

तुमारे खत मीले हैं। मैंने पिताजीको खत लीखा है उसका उत्तर दिल्लीमें मीलनेकी आशा है। जो कुछ भी हो तुमारे निश्चित रहना है। बाकी तो मीलने पर क्योंकी मैं बुधके रोज आश्रम पहोंचनेकी आशा रखता हूँ।

बापूके आशीर्वाद

जी॰ एन॰ ३३१४ की फोटो-नकलसे।

 
  1. डाककी मुहरसे।
  2. गांधीजी सिन्धके दौरेके बाद दिल्ली रुकते हुए बुधवार २० फरवरी, १९२९ को आश्रम पहुँचे थे।